एमपी में स्कूलों की ‘लापरवाही’ से होनहार विद्यार्थी हुए फेल

मध्यप्रदेश के देवास जिले में कई सरकारी और निजी स्कूलों की लापरवाही से कक्षा पांचवीं और आठवीं के कई होनहार विद्यार्थियों के सपनों को चकनाचूर कर दिया। इन छात्रों ने 90% से भी अधिक अंक प्राप्त किए थे, लेकिन स्कूल प्रबंधनों की गलती के कारण वे परीक्षा में फेल हो गए। कारण था कि विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और अर्द्धवाषिक परीक्षा के अंक पोर्टल पर सही तरीके से दर्ज नहीं किए गए थे।

शिक्षा विभाग ने दी थी कई बार चेतावनी
शिक्षा विभाग ने बार-बार स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वे अर्द्धवाषिक परीक्षा और प्रोजेक्ट के अंकों को पोर्टल पर अपलोड करें, लेकिन कई स्कूलों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजतन, लाखों रुपए खर्च कर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के अच्छे अंक होने के बावजूद उनके परिणाम प्रभावित हुए। इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों में भी गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

20 स्कूलों के परिणाम हुए प्रभावित
शुरुआत में, देवास विकासखंड के लगभग 20 स्कूलों के विद्यार्थियों के अंक पोर्टल पर दर्ज नहीं हुए थे। इनमें से अधिकांश निजी स्कूल थे, जबकि दो से तीन सरकारी स्कूल भी प्रभावित हुए। यदि स्कूल समय रहते अंक दर्ज नहीं करते, तो यह संख्या सैकड़ों में पहुंच सकती थी, जिससे हजारों विद्यार्थियों के परिणाम पर असर पड़ता।

अब डीपीसी या बीआरसी स्तर पर दर्ज होंगे अंक
स्कूल प्रबंधनों को फिलहाल पोर्टल पर अंक दर्ज करने की अनुमति नहीं होगी। जिन विद्यार्थियों के अंक दर्ज नहीं हुए हैं, उनके लिए अब शेष कार्य केवल डीपीसी या बीआरसी स्तर पर ही पूरा हो सकेगा।

नाराज अभिभावक और शिक्षक
अभिभावकों और स्कूलों के प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, इस लापरवाही ने न केवल बच्चों की मेहनत पर पानी फेरा, बल्कि उनके भविष्य को भी प्रभावित किया है। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही कितनी महंगी साबित हो सकती है।