Income Tax Update: आय छिपाने पर 30% अतिरिक्त कर, ईमानदार करदाताओं को राहत, पुरानी टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बजट 2025 पेश किया। वेतनभोगी कर्मचारियों को इनकम टैक्स स्लैब में राहत की उम्मीद थी। लेकिन सरकार ने मौजूदा कर ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया है।

नई और पुरानी दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में दरें वही रहेंगी। मध्यम वर्ग को कर छूट बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। हालांकि वित्त मंत्री ने इस बार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।

नई टैक्स व्यवस्था में स्लैब

नई कर व्यवस्था के तहत 3 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। 3 से 7 लाख रुपये की आय पर 5 प्रतिशत कर देय है। 7 से 10 लाख रुपये पर 10 प्रतिशत दर लागू होती है।

10 से 12 लाख रुपये की आय पर 15 प्रतिशत टैक्स लगता है। 12 से 15 लाख रुपये पर 20 प्रतिशत दर निर्धारित है। 15 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर चुकाना होता है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था बरकरार

पुरानी कर व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त है। 2.5 से 5 लाख रुपये पर 5 प्रतिशत टैक्स लगता है। 5 से 10 लाख रुपये की आय पर 20 प्रतिशत दर लागू होती है।

10 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर चुकाना पड़ता है। इस व्यवस्था में विभिन्न कटौतियों का लाभ मिलता है। धारा 80C, 80D और गृह ऋण ब्याज में छूट उपलब्ध है।

वेतनभोगियों की प्रतिक्रिया

कर्मचारी संगठनों ने निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में राहत जरूरी थी। टैक्स स्लैब में बदलाव से मध्यम वर्ग को फायदा होता।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना चाहती है। इसलिए प्रत्यक्ष कर संग्रह में कमी नहीं करना चाहती। अगले वित्त वर्ष में शायद कुछ राहत मिल सकती है।

अन्य घोषणाएं

बजट में बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया है। कृषि और ग्रामीण विकास के लिए आवंटन बढ़ाया गया है। स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की योजना है।

स्वास्थ्य और शिक्षा बजट में भी वृद्धि की गई है। डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रोजगार सृजन के लिए विशेष पैकेज की घोषणा हुई है।

विपक्षी दलों ने बजट को मध्यम वर्ग विरोधी बताया है। उनका कहना है कि आम आदमी को कोई लाभ नहीं मिला। सत्तापक्ष ने बजट को संतुलित और विकासोन्मुखी बताया है।