बुलियन मार्केट अपडेट: पश्चिम एशिया के तनाव के बीच सोना-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल, चांदी ₹5,380 महँगी

नई दिल्ली/मुंबई: वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया के हालातों के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को भारी तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और बाजार में लौटी खरीदारी के कारण चांदी की कीमतों में करीब 5,380 रुपये का बड़ा उछाल देखा गया, जबकि सोना भी 1.41 लाख रुपये के स्तर पर पहुँच गया है।
घरेलू बाजार का हाल: रिकॉर्ड स्तर की ओर कीमतें
भारतीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को रौनक लौट आई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने एक बार फिर बुलियन (सोना-चांदी) की ओर रुख किया है। चांदी की कीमत 5,380 रुपये की बढ़त के साथ 2.25 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है। वहीं, सोने के भाव में भी 1,320 रुपये की वृद्धि हुई, जिससे यह 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
वैश्विक बाजार: अंतरराष्ट्रीय संकेतों से मिली राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ सत्रों से जारी गिरावट पर शुक्रवार को ब्रेक लगा। वैश्विक निवेशकों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले से अस्थायी राहत मिली है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ समझौते की समयसीमा को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।
  • कॉमेक्स (Comex): सोना 0.33% बढ़कर 4,423 डॉलर प्रति औंस पर पहुँचा।
  • चांदी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 0.29% की बढ़त के साथ 68.13 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।
कीमतों में बदलाव के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई इस तेजी के पीछे कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण हैं:
  1. ट्रंप का फैसला: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर कार्रवाई को 10 दिनों के लिए टालने के संकेत से बाजार की घबराहट कम हुई है।
  2. ब्याज दरों की आशंका: ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से महंगाई का खतरा बना हुआ है। यदि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रखते हैं, तो सोने-चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बना रह सकता है।
  3. मजबूत डॉलर: डॉलर इंडेक्स 100 के करीब बना हुआ है। मजबूत डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटीज महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है।
  4. सेंट्रल बैंक की हलचल: रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की के केंद्रीय बैंक द्वारा बड़े पैमाने पर (करीब 60 टन) सोना बेचने या स्वैप करने से भी बाजार की धारणा पर असर पड़ा है।
निष्कर्ष: एक महीने का उतार-चढ़ाव
पिछले एक महीने में पश्चिम एशिया के संघर्ष के दौरान सोने की कीमतों में करीब 17% तक का उतार-चढ़ाव देखा गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौर में सोना पारंपरिक सुरक्षित निवेश के बजाय शेयर बाजार की चाल के साथ चलता दिखाई दिया। फिलहाल, निवेशकों की नजरें वैश्विक हालातों और डॉलर की मजबूती पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करेंगे।