New Delhi : भारत सरकार हर साल 11 से 17 जनवरी तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाती है।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस के मौके पर केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने भारत में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों, खासकर युवाओं में, पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में होने वाली अधिकांश मौतें और स्थायी विकलांगता रोकी जा सकती हैं, यदि पीड़ित को हादसे के बाद पहले एक घंटे के भीतर सही मेडिकल इलाज मिल जाए, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, इमरजेंसी में आने वाले मरीजों में एक बड़ा हिस्सा सड़क हादसों के पीड़ितों का होता है, जिनमें अधिकतर की उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होती है। डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि जिम्मेदार ड्राइविंग और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करके इन त्रासदियों को काफी हद तक टाला जा सकता है।
‘गोल्डन ऑवर’ क्यों है जीवन रक्षक?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सड़क दुर्घटना के बाद के पहले 60 मिनट पीड़ित के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान घायल व्यक्ति को उन्नत ट्रॉमा सुविधाओं वाले अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसके बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। समय पर मिला इलाज न केवल मृत्यु के खतरे को कम करता है, बल्कि गंभीर जटिलताओं को रोककर मरीज को तेजी से ठीक होने में भी मदद करता है।
“सड़क दुर्घटनाएं समय के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। हमारे पास अक्सर सिर में गंभीर चोट, अंदरूनी रक्तस्राव और मल्टीपल ट्रॉमा के मरीज आते हैं। बचाव में देरी और गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल न पहुंच पाने से स्थिति और बिगड़ जाती है। हेलमेट-सीट बेल्ट पहनना और नशे में गाड़ी न चलाना जैसे छोटे कदम अनगिनत जिंदगियां बचा सकते हैं।” — डॉ. निखिलेश जैन, सीनियर कंसल्टेंट, इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर, केयर हॉस्पिटल्स
दुर्घटना का दीर्घकालिक असर
सड़क हादसे पीड़ितों और उनके परिवारों पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से भारी पड़ते हैं। कई मामलों में जटिल फ्रैक्चर और रीढ़ की हड्डी की चोटें स्थायी विकलांगता का कारण बन जाती हैं।
“कई पीड़ितों को कई सर्जरी और लंबे रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ता है। यातायात नियमों का पालन और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग चोटों की गंभीरता और दीर्घकालिक जटिलताओं को काफी हद तक कम कर सकता है।” — डॉ. प्रवीण अग्रवाल, कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन, केयर हॉस्पिटल्स
हादसे के बाद क्या करें?
केयर हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने दुर्घटना के बाद सही फर्स्ट रिस्पॉन्स के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने सलाह दी कि जब तक बहुत जरूरी न हो, पीड़ित को हिलाना-डुलाना नहीं चाहिए, खासकर अगर सिर, गर्दन या रीढ़ में चोट की आशंका हो। तेज रक्तस्राव को रोकने के लिए साफ कपड़े से दबाव डालें और तुरंत एम्बुलेंस को फोन करें। पीड़ित को कुछ भी खाने या पीने को न दें।
इस अवसर पर, केयर हॉस्पिटल्स ने दोहराया कि सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है और सड़क पर लिया गया एक सतर्क फैसला किसी की जान बचा सकता है।