CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा: विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में 5 सेक्शन होंगे, 50% प्रश्न योग्यता आधारित रहेंगे

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आगामी 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक नया ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया है। इस बार विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्रों के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों की रटने की प्रवृत्ति को कम कर उनकी तार्किक क्षमता को परखना है।

नई योजना के अनुसार, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्रों को अब पांच अलग-अलग खंडों (Sections) में विभाजित किया जाएगा। इसमें वस्तुनिष्ठ प्रश्नों से लेकर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न तक शामिल होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब 50 प्रतिशत प्रश्न योग्यता आधारित (Competency Based) होंगे, जो छात्रों की वास्तविक समझ का आकलन करेंगे।

पांच खंडों में ऐसा होगा प्रश्नपत्र का ढांचा

बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, प्रश्नपत्र का कुल अंक 80 होगा। इसे हल करने के लिए छात्रों को 3 घंटे का समय मिलेगा। प्रश्नपत्र के पांच सेक्शन इस प्रकार होंगे:

सेक्शन ए (Section A): इसमें 20 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होगा।

सेक्शन बी (Section B): इस खंड में 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न होंगे। हर प्रश्न के लिए 2 अंक निर्धारित हैं और इनका उत्तर 30 से 50 शब्दों में देना होगा।

सेक्शन सी (Section C): इसमें 7 लघु उत्तरीय प्रश्न शामिल होंगे। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का होगा और शब्द सीमा 50 से 80 शब्द रहेगी।

सेक्शन डी (Section D): यह खंड दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का होगा। इसमें 3 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक 5 अंक का होगा। छात्रों को इनका उत्तर 80 से 120 शब्दों में लिखना होगा।

सेक्शन ई (Section E): इसमें 3 केस-आधारित या स्रोत-आधारित प्रश्न होंगे। प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का होगा।

रटने की बजाय समझने पर जोर

CBSE ने इस बार परीक्षा पैटर्न में योग्यता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी है। इसका सीधा अर्थ है कि छात्रों को अब केवल किताबी ज्ञान रटने से सफलता नहीं मिलेगी। उन्हें विषयों की गहरी समझ विकसित करनी होगी। ये प्रश्न केस स्टडी, रीजनिंग और रियल लाइफ सिचुएशन पर आधारित हो सकते हैं।

इसके अलावा, प्रश्नपत्र में 20 प्रतिशत प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQ) होंगे। शेष 30 प्रतिशत प्रश्न लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रारूप में होंगे। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत किया गया है ताकि छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच को बढ़ावा मिल सके।

सामाजिक विज्ञान में मैप वर्क अनिवार्य

सामाजिक विज्ञान के पेपर में मैप वर्क (मानचित्र कार्य) का भी विशेष महत्व रखा गया है। भूगोल और इतिहास से संबंधित प्रश्न मानचित्र के माध्यम से हल करने होंगे। वहीं, विज्ञान के पेपर में भी केस स्टडी आधारित प्रश्न छात्रों की व्यावहारिक समझ को परखेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए पैटर्न से छात्रों पर परीक्षा का तनाव कम होगा और वे विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे प्री-बोर्ड परीक्षाएं भी इसी नए पैटर्न के आधार पर आयोजित करें ताकि छात्र मुख्य परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।