बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: 20 साल बाद BNP की वापसी, तारिक रहमान का PM बनना तय!

Dhaka News: बांग्लादेश की राजनीति में गुरुवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आया। आम चुनाव के नतीजों ने देश की सत्ता की चाबी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के हाथों में सौंप दी है। 2008 से लगातार सत्ता पर काबिज शेख हसीना की अवामी लीग के पतन के बाद, यह जीत BNP के लिए दो दशकों का वनवास खत्म होने जैसी है।
बहुमत के आंकड़े से बहुत आगे BNP
कुल 299 सीटों में से अब तक 286 के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जिसमें BNP ने अकेले 209 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। सरकार बनाने के लिए जरूरी 150 के जादुई आंकड़े को पार्टी ने आसानी से पार कर लिया। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को केवल 70 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री और ‘बैटन’ का हस्तांतरण
इस जीत के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है। तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर ही बड़ी जीत दर्ज की।
दिलचस्प बात यह है कि 1991 के बाद से बांग्लादेश की सत्ता बारी-बारी से शेख हसीना और खालिदा जिया के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब 35 साल बाद (1988 में काजी जफर अहमद के बाद) देश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है।
जमात और छात्र संगठनों की हार के मुख्य कारण
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस चुनाव में तीन बड़े बदलाव देखे गए:
  • वोट बैंक का ध्रुवीकरण: अवामी लीग की अनुपस्थिति में हिंदू मतदाताओं और अवामी लीग के पारंपरिक समर्थकों ने कट्टरपंथ के डर से BNP को वोट दिया। गोपालगंज और सिलहट जैसे पुराने गढ़ों में भी BNP ने जीत दर्ज की।
  • जमात का दाग: जमात-ए-इस्लामी द्वारा 1971 के मुक्ति संग्राम का विरोध आज भी जनता भूली नहीं है। लोग कट्टरपंथ के बजाय स्थिरता चाहते थे।
  • छात्र राजनीति की विफलता: शेख हसीना सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा करने वाली छात्रों की पार्टी ‘नेशनल सिटीजन पार्टी’ (NCP) को जनता ने सिरे से नकार दिया। जमात के साथ उनका गठबंधन और आंतरिक कलह उनकी हार की बड़ी वजह बनी।