मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान चर्चा में है। कथावाचन के दौरान उन्होंने युवाओं और खासकर लड़कियों को संबोधित किया। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि लड़कियां दुर्गा और काली की तरह बनें और बुर्का न पहनें।
उनके वक्तव्य का वीडियो और बयान सार्वजनिक होने के बाद इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। बागेश्वर धाम से जुड़े आयोजनों के भाषण अक्सर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलते हैं। इस बार भी बयान ने सोशल मीडिया पर बहस को तेज कर दिया।
“लड़की, दुर्गा बनो, काली बनो, बुर्का मत पहनो।” — पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख चेहरों में माने जाते हैं और उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनके प्रवचनों के अंश नियमित रूप से YouTube, Facebook और अन्य प्लेटफॉर्म पर साझा होते हैं। इसी वजह से मंच से कही गई बातों का प्रभाव स्थानीय दायरे से आगे बढ़कर राष्ट्रीय चर्चा का रूप ले लेता है।
क्या है पूरा संदर्भ
छतरपुर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं से आचरण, पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों पर बात की। इसी संबोधन में उन्होंने लड़कियों के परिधान को लेकर यह टिप्पणी की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बयान अपील के रूप में दिया गया, जिसे बाद में क्लिप के रूप में व्यापक तौर पर शेयर किया गया।
बागेश्वर धाम में होने वाले कार्यक्रमों में धार्मिक भाषा और प्रतीकों का इस्तेमाल प्रमुख रहता है। इस बयान में भी दुर्गा और काली जैसे धार्मिक संदर्भों का उल्लेख किया गया। हालांकि, चर्चा का केंद्र वह पंक्ति बनी जिसमें बुर्का न पहनने की बात कही गई।
सोशल मीडिया पर बहस क्यों बढ़ी
धार्मिक मंचों से आने वाले बयान जब परिधान या पहचान जैसे विषयों से जुड़ते हैं, तो उनकी प्रतिक्रिया सामान्यतः तेज होती है। इस मामले में भी यही हुआ। समर्थक और आलोचक दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। कुछ लोगों ने इसे सांस्कृतिक आग्रह बताया, जबकि अन्य ने इसे निजी चुनाव से जुड़े प्रश्न के तौर पर देखा।
फिलहाल इस बयान को लेकर सार्वजनिक विमर्श जारी है। प्रशासनिक स्तर पर किसी औपचारिक कार्रवाई या कानूनी स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। मामला मुख्य रूप से सार्वजनिक टिप्पणी और उस पर आई प्रतिक्रियाओं के दायरे में ही देखा जा रहा है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। उनके कार्यक्रमों की पहुंच बड़ी होने के कारण हर टिप्पणी पर सार्वजनिक नजर रहती है। इस बार भी छतरपुर के मंच से दिया गया संदेश धार्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सवालों के साथ चर्चा में बना हुआ है।