एमपी में 4 हजार करोड़ की मेगा परियोजना को रफ्तार, 100 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ

छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े करीब 4000 करोड़ रुपये के कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। परियोजना के इस चरण को क्षेत्र में बुनियादी निर्माण की दिशा में अहम प्रशासनिक शुरुआत माना जा रहा है। भूमि उपलब्धता को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कामों की पहली शर्त माना जाता है, इसलिए अधिग्रहण शुरू होने से निर्माण एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र की बहुचर्चित जल परियोजनाओं में शामिल है। छतरपुर इसका प्रमुख प्रभावित और लाभार्थी इलाका माना जाता है। परियोजना के लिए चिन्हित हिस्सों में जमीन की कानूनी उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद ही नहर, संरचनात्मक निर्माण और संबंधित कनेक्टिविटी कार्य समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सकते हैं। इसी क्रम में अब जिले में अधिग्रहण प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है।

प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत भूमि अधिग्रहण में आमतौर पर रिकॉर्ड सत्यापन, राजस्व सीमांकन, दावों की जांच और मुआवजा निर्धारण जैसी कार्रवाइयां शामिल होती हैं। छतरपुर में भी अब यही क्रम लागू होगा। परियोजना का दायरा बड़ा होने से संबंधित विभागों के बीच समन्वय और दस्तावेजी पारदर्शिता पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।

छतरपुर खंड में परियोजना को गति देने की तैयारी

करीब 4000 करोड़ रुपये के कार्यों से जुड़े भूमि अधिग्रहण की शुरुआत यह संकेत देती है कि छतरपुर हिस्से में परियोजना को अब कागजी स्तर से आगे बढ़ाकर मैदानी चरण में ले जाने की तैयारी है। बड़े जल संसाधन और सिंचाई ढांचे वाले प्रोजेक्ट में अधिग्रहण की देरी अक्सर लागत और समय-सीमा दोनों को प्रभावित करती है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर जमीन से संबंधित अड़चनों को कम करना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

जिला स्तर पर इस प्रक्रिया में राजस्व विभाग की भूमिका केंद्रीय रहती है। जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, स्वामित्व, उपयोग और दावों की प्रकृति के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होती है। प्रशासनिक ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि अधिसूचना, आपत्तियों और अंतिम आदेश की प्रक्रिया कानून के अनुरूप पूरी हो।

परियोजना का क्षेत्रीय असर और अगला रोडमैप

केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड क्षेत्र में जल प्रबंधन से जोड़कर देखा जाता है। छतरपुर में भूमि अधिग्रहण की शुरुआत से यह स्पष्ट है कि सरकार परियोजना के क्रियान्वयन चरण को आगे बढ़ाना चाहती है। आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिग्रहण की प्रक्रिया तय समय में कितनी तेजी और कानूनी स्पष्टता के साथ पूरी होती है।

मैदानी काम शुरू होने से पहले प्रभावित भू-भाग का अंतिम सत्यापन और तकनीकी मंजूरियां भी अहम रहती हैं। इसलिए आने वाले समय में परियोजना से जुड़े विभागीय आदेश, स्थानीय स्तर की सुनवाई और भुगतान से संबंधित कदम इस प्रक्रिया की गति तय करेंगे। फिलहाल छतरपुर में भूमि अधिग्रहण की शुरुआत को केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए एक निर्णायक प्रशासनिक पड़ाव माना जा रहा है।