मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के यात्री परिवहन, शासकीय सेवकों के भत्तों और धार्मिक स्थलों से संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका राज्यवासियों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। आइए, इन फैसलों पर विस्तार से नजर डालें।
1. मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत:
मध्यप्रदेश में अब सार्वजनिक यात्री परिवहन को और अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” की शुरुआत की जाएगी। इस योजना के तहत, प्रदेश के ग्रामीण और साधारण मार्गों पर एक व्यवस्थित और नियोजित तरीके से बसों का संचालन किया जाएगा। इसके लिए 101 करोड़ 20 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परिवहन सेवा को निजी क्षेत्र द्वारा संचालित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को उच्च गुणवत्ता और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।
इसके अलावा, 7 संभागीय कंपनियों के एकीकृत नियंत्रण के लिए एक होल्डिंग कंपनी का गठन भी किया जाएगा, जो बस संचालन, इंफ्रास्ट्रक्चर, और सुरक्षा मानकों की निगरानी करेगी। इस योजना में आई.टी. प्लेटफॉर्म के माध्यम से बसों की ट्रैकिंग और यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।
2. मोटरयान नियम 1994 में संशोधन:
मध्यप्रदेश सरकार ने म.प्र. मोटरयान नियम 1994 में आवश्यक संशोधन करने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी है। इस संशोधन से यात्री परिवहन सेवाओं के संचालन को और अधिक व्यवस्थित किया जाएगा। इससे संबंधित सभी कार्यवाही प्रशासकीय विभाग द्वारा विधिक रूप से की जाएगी।
3. शासकीय सेवकों के भत्तों का पुनरीक्षण:
मंत्रिपरिषद ने राज्य के शासकीय सेवकों के भत्तों में वृद्धि की स्वीकृति दी है। इसमें गृह भाडा भत्ते, दैनिक भत्ता, वाहन भत्ता, और अन्य भत्तों में संशोधन किया जाएगा। यह संशोधन शासकीय कर्मचारियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए किया गया है। इसके अलावा, शासकीय सेवकों की मृत्यु पर उनके परिवार को अनुग्रह अनुदान भी बढ़ाया जाएगा, जो अब 1 लाख 25 हजार रुपये तक होगा।
4. छतरपुर में माता बम्बरबैनी मंदिर को पवित्र क्षेत्र घोषित:
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम लवकुशनगर स्थित प्राचीन माता बम्बरबैनी मंदिर को अब पवित्र क्षेत्र घोषित किया गया है। इस निर्णय से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इस स्थल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित किया जाएगा।
5. पीपीपी मॉडल के तहत बस परिवहन अधोसंरचना का विकास:
बसों के संचालन और उनकी देखरेख के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को अपनाया जाएगा। इसके तहत, प्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाली बसों का संचालन और उनकी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। यात्रियों को मोबाइल ऐप के माध्यम से बुकिंग, ट्रैकिंग और कैशलेस सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए ई-बसों और इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना भी की जाएगी।