केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को भोपाल स्थित अपने निवास पर ‘जी रामजी’ बिल को लेकर एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने मनरेगा योजना पर तीखा हमला बोला और इसे भ्रष्टाचार का प्रतीक करार दिया। शिवराज सिंह ने खासतौर पर पंजाब सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि वहां भ्रष्टाचार की स्थिति बेहद गंभीर है। उल्लेखनीय है कि पंजाब विधानसभा ने हाल ही में विशेष सत्र बुलाकर केंद्र सरकार की ‘जी रामजी’ योजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है, जिसे लेकर सियासी बहस तेज हो गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा को शुरू हुए करीब 20 साल हो चुके हैं। इससे पहले भी कई रोजगार योजनाएं आईं, जिनका या तो स्वरूप बदला गया या नाम बदल दिया गया। उनका आरोप था कि मनरेगा धीरे-धीरे भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई। मजदूरों की जगह मशीनों और ठेकेदारों से काम कराया जाने लगा। फर्जी हाजिरी, एक ही काम को बार-बार दिखाना और ओवर स्टेटमेंट जैसे मामले आम हो गए थे। इसी वजह से बीते एक साल से इस योजना के विकल्प और सुधार पर गंभीर मंथन चल रहा था।
शिवराज सिंह ने पंजाब सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब पूरी तरह करप्शन से ग्रसित है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के आधे से ज्यादा गांवों का अब तक ऑडिट तक नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की जा रही। मंत्री ने कहा कि खुद मजदूर शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें समय पर मजदूरी तक नहीं मिल रही है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
केंद्रीय मंत्री ने ‘जी रामजी’ योजना को पारदर्शी और व्यावहारिक बताते हुए इसके फायदे भी गिनाए। उन्होंने कहा कि इस नई योजना में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। खेती के लिहाज से अहम बुवाई और कटाई के समय राज्य सरकारें इस योजना के कार्यों को अस्थायी रूप से स्थगित भी कर सकेंगी, ताकि किसानों को परेशानी न हो। उन्होंने संसद में विपक्ष के हंगामे का जिक्र करते हुए कहा कि जबरन शोर-शराबा किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मजबूती से अपनी बात रखी। पंजाब विधानसभा में एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाना संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है और यह अंधविरोध की राजनीति का उदाहरण है।
शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि मनरेगा न तो गांवों के समग्र विकास के लिए कारगर साबित हुई और न ही मजदूरों के हित में पूरी तरह उपयोगी रही। उनका कहना था कि मनरेगा के तहत खर्च हो रहा पैसा गांवों के सुनियोजित विकास में नहीं लग पा रहा था। इसी कमी को दूर करने के लिए ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत ‘जी रामजी’ योजना लाई गई है। इस नई योजना में मजदूरों को मिलने वाले रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है। इसके लिए वित्तीय प्रावधान भी किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर बजट और बढ़ाने का भरोसा दिया गया है। साथ ही, मनरेगा में सहायक स्टाफ को वेतन न मिलने की शिकायतों को देखते हुए प्रशासनिक खर्च की सीमा 6 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी कर दी गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें कहा गया था कि मंत्री को ही योजना की जानकारी नहीं है। शिवराज ने तंज कसते हुए कहा कि स्वर्गीय प्रधानमंत्री हों या राहुल बाबा, वे कल्पना लोक में रहते हैं, देश की जमीनी हकीकत से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जमकर तारीफ की। शिवराज ने कहा कि सीएम मोहन यादव बहुत तेज गति से काम कर रहे हैं और उनमें जबरदस्त ऊर्जा है। मेरी शुभकामनाएं हैं कि वे इसी रफ्तार से प्रदेश के विकास के लिए काम करते रहें।
अंत में संघ को लेकर दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर बुद्धि और विवेक से काम करना चाहिए। कुल मिलाकर, इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए केंद्रीय मंत्री ने न सिर्फ ‘जी रामजी’ योजना का बचाव किया, बल्कि विपक्ष और खासतौर पर पंजाब सरकार पर तीखे सियासी वार भी किए, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और गरमाने के आसार हैं।