पानी की किल्लत दूर करने wells-stepwells की कर रहे सफाई

स्वतंत्र समय, इंदौर

शहर में पानी का स्तर कम न हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए इंदौर नगर निगम ने शहर के परंपरागत कुएं-बावड़ी ( wells-stepwells ) का जीर्णोद्धार करने में जुटा है। शहर में कुएं और बावडिय़ों की वर्तमान स्थिति यह है की कुल 380 में से 218 कुएं सक्रिय है जिनसे क्षेत्र के लोग पानी का उपयोग लोग कर रहे। जबकि 23 बावडिय़ों की मरम्मत कर जीर्णोद्धार कर दिया गया है। अब नगर निगम ने बारिश के मौसम से पहले शहर के 30 बावड़ी और 162 कुओं का जीर्णोद्धार करने की योजना बनाई है। अगले सप्ताह कई कुएं और बावडिय़ों के जीर्णोव्दार का काम भी शुरु हो जाएगा। इसके लिए निगम टैंडर प्रक्रिया शुरु कर रहा है।

wells-stepwells के पानी का उपयोग ऐसे होगा

निगम से मिली जानकारी के मुताबिक शहर के कुएं और बावडिय़ों ( wells-stepwells ) का जीर्णोद्धार और सफाई के बाद इनके पानी का उपयोग कचरा गाड़ी धोने, बगीचों की सिंचाई करने और शौचालय में होगा। साथ ही हाईडेंट भी बनाए जाएंगे, ताकि टैंकर भरकर कुएं-बावड़ी का पानी पीने के अलावा अन्य उपयोग में लिया जा सके। निगम की जलकार्य समिति के अनुसार शहर का भूजल स्तर गिरने से इंदौर रेड जोन में आ गया है। साथ ही धड़ल्ले से होने वाले बोरवेल की वजह से जल स्तर काफी गिर चुका है। 500 से 900 फीट तक खुदाई करने पर भी पानी नहीं निकलता है। इसे देखते हुए कुएं बावडिय़ों को साफ करने के साथ जीर्णोद्धार करने की याद निगम जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग को आई है।

जोनवाइज wells-stepwells की लिस्ट बुलवाई

इंदौर नगर निगम के 19 जोन अंतर्गत आने वाले 85 वार्डों में 552 कुओं में से 380 की हालत सुधार दी गई है। अब 162 कुओं का जीर्णोद्धार होने वाला है। इसके साथ ही 53 में से 23 बावडिय़ों को साफ कर सुधारने के बाद बची 30 बावड़ी का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके लिए निगम मुख्यालय पर लगने वाले जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग ने जोनवाइज कुएं-बावड़ी की सूची बुलवा ली है। अब दो-चार दिन में टेंडर निकाल दिए जाएंगे।

218 कुओं का पानी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं

इस संबंध में निगमायुक्त शिवम वर्मा का कहना है कि पिछले दो-तीन साल में 542 में से 380 कुएं और 53 में से 23 बावड़ी साफ कर जीर्णोद्धार कर चुके हैं। 218 कुओं का पानी लोग उपयोग भी कर रहे है। इस बार की प्लानिंग के हिसाब से 162 कुओं का जीर्णोद्धार और सफाई कार्य होने के बाद 100 कुओं पर हाईडेंट बनाए जाएंगे। इन हाईडेंट से टैंकर भरकर पीने के अलावा अन्य उपयोग के लिए पानी सप्लाय किया जाएगा।

ऐसे होगा काम

कुओं और बावड़ी की साफ-सफाई की जाएगी, डी वॉटरिंग की जाएगी, जरूरत के हिसाब से खुदाई कर कुओं का गहरीकरण किया जाएगा, कुएं के तल तक जमी गाद निकाली जाएगी , रेन वाटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे , कुएं के आसपास घर है, तो बारिश का पानी पाईप के जरिए छत से कुएं में डाला जाएगा, प्लेटफॉर्म का निर्माण होगा, कुओं की मुंडेर बनाना, सुरक्षा की दृष्टि से जाली लगाना, कचरा या फिर अन्य सामग्री न डालने को लेकर सुरक्षा बोर्ड लगाना, डिवाइडर धोने, बगीचों में सिंचाई करने और शौचालय-मूत्रालय आदि में कुएं बावड़ी का पानी उपयोग किया जाएगा। इससे नर्मदा और बोलवेल का पानी बचेगा, जो कि पीने में उपयोग आएगा।