मध्य प्रदेश में ग्रामीण विकास और रोजगार के मोर्चे पर सरकार ने एक नई पहल को तेज किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘जी राम-जी’ (जल, जंगल, जमीन, जानवर, जन) योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत ग्रामीणों को साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह योजना न केवल रोजगार सृजन करेगी, बल्कि गांवों के बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ करेगी।
सीएम यादव ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि जब गांव के संसाधनों का सही प्रबंधन होगा, तभी प्रदेश का समग्र विकास संभव हो सकेगा। ‘जी राम-जी’ योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जल संरक्षण और ग्रामीण विकास पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘जी राम-जी’ योजना का खाका तैयार करते समय जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत तालाबों का गहरीकरण, नए चेक डैम का निर्माण और वृक्षारोपण जैसे कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को ही रोजगार दिया जाएगा, जिससे पलायन जैसी समस्याओं पर भी रोक लग सकेगी।
डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि मनरेगा की तर्ज पर इस योजना में भी रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। जहां मनरेगा में 100 दिन का रोजगार मिलता है, वहीं इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार इसे बढ़ाकर 125 दिन करने की दिशा में काम कर रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सीधे तौर पर नकदी का प्रवाह बढ़ेगा।
पांच तत्वों पर आधारित है योजना
इस योजना का नाम ‘जी राम-जी’ रखने के पीछे गहरा अर्थ छिपा है। यह पांच प्रमुख तत्वों पर आधारित है – जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन पांचों तत्वों के संतुलन से ही एक आदर्श गांव की परिकल्पना साकार हो सकती है।
- जल: वर्षा जल का संचयन और पुराने जल स्रोतों का पुनरुद्धार।
- जंगल: सामुदायिक वानिकी और हरियाली बढ़ाना।
- जमीन: मिट्टी की उर्वरता बचाना और बंजर भूमि का सुधार।
- जानवर: पशुपालन को बढ़ावा देना और गौशालाओं का निर्माण।
- जन: मानव संसाधन का उपयोग कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे गांव
सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा। जब गांव में रोजगार उपलब्ध होगा, तो लोग शहरों की ओर भागना बंद करेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार जल्द ही इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर सकती है, जिससे जमीनी स्तर पर काम शुरू हो सके।