आगर मालवा जिला मुख्यालय के जिला पंचायत परिसर में बुधवार को होली मेला आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की। यह आयोजन आजीविका मिशन के तहत हुआ और इसका फोकस स्थानीय स्तर पर तैयार स्वदेशी सामग्री को बाजार से जोड़ना रहा।
प्रदेश स्तर पर इस पहल की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से वर्चुअल माध्यम से की। राज्य के सभी जिलों में इसी स्वरूप के मेले लगाए गए, ताकि त्योहार के समय स्थानीय उत्पादन को सीधा खरीदार मिल सके और समूहों की आय बढ़े।
होली से जुड़े उत्पादों पर खरीदारों का ध्यान
मेले में होली पर्व को ध्यान में रखते हुए विशेष स्टॉल लगाए गए थे। यहां गोबर से बनी गुलरिया, कंडे, हर्बल गुलाल और हाथ से तैयार की गई गुजिया की मांग अधिक रही। इन उत्पादों को पारंपरिक उपयोग और स्थानीय निर्माण के कारण लोगों ने प्राथमिकता से खरीदा।
इनके अलावा टेराकोटा की सामग्री, बैग, घी, मावा और अन्य हस्तशिल्प वस्तुएं भी उपलब्ध रहीं। स्टॉलों पर उत्पादों की विविधता से खरीदारों को त्योहार से जुड़ी जरूरतों के साथ घरेलू उपयोग की चीजें भी एक ही जगह पर मिलीं।
स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी इस मेले की मुख्य धुरी रही। समूहों ने न केवल उत्पाद प्रदर्शित किए, बल्कि खरीदारों को निर्माण प्रक्रिया, उपयोग और कीमत की जानकारी भी दी। इससे उत्पादों पर भरोसा बढ़ा और स्थानीय ब्रांडिंग को मदद मिली।
महिला समूहों को बाजार और आय से जोड़ने की पहल
आयोजन का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। त्योहार आधारित मांग के समय ऐसे मेले समूहों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ते हैं, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटती है और समूहों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।
इस तरह के आयोजनों में छोटे स्तर पर काम करने वाले समूहों को दृश्यता मिलती है। जिला मुख्यालय पर मेला लगने से शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की पहुंच आसान रहती है, जिसका असर बिक्री और नेटवर्क दोनों पर दिखता है।
खरीदारी के साथ योजनाओं की जानकारी भी
मेले को केवल व्यापारिक गतिविधि तक सीमित नहीं रखा गया। विभिन्न सरकारी विभागों ने सूचना स्टॉल लगाकर नागरिकों को जनहितकारी योजनाओं की जानकारी दी। इस व्यवस्था से लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाए बिना कई योजनाओं की बुनियादी जानकारी एक ही स्थान पर मिली।
इन स्टॉलों पर पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और लाभ से जुड़ी जानकारी साझा की गई। त्योहार के दौरान अधिक संख्या में आने वाले नागरिकों के कारण यह मंच जन-जागरूकता के लिए भी उपयोगी साबित हुआ।
कुल मिलाकर, आगर मालवा का होली मेला स्थानीय उत्पादन, महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका और सरकारी जानकारी के एकीकृत मॉडल के रूप में सामने आया। वर्चुअल शुभारंभ के जरिए इसे राज्यव्यापी अभियान से जोड़कर जिला स्तर के आयोजनों को एक साझा दिशा देने की कोशिश की गई।