10 Coal mines बंद, फिर भी सरकार सिफारिश को तैयार नहीं

स्वतंत्र समय, भोपाल

बजट सत्र को जल्द निपटाने विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार देर रात 9 बजे तक सदन की कार्यवाही चलाई। परासिया क्षेत्र की दस कोल माइंस ( Coal mines ) की हजारों एकड़ जमीन को लेकर विधानसभा में लाए गए संकल्प पर असमंजस की स्थिति बन गई। इन कोल माइंस को बंद करने की सिफारिश केंद्र सरकार को करने पर मप्र सरकार तैयार नहीं हुई, जबकि संसदीय कार्य मंत्री इस पर सहमत थे। वैसे भारत सरकार की सहमति के बिना इन माइंस को बंद नहीं किया जा सकता।

निजी क्षेत्र के मालिक चलाते हैं Coal mines

कोल माइंस ( Coal mines )  का यह मामला रात नौ बजे के बाद तब उठा जब सदन में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अशासकीय संकल्पों पर चर्चा शुरू कराई। इस दौरान कांग्रेस के परासिया से विधायक सोहन लाल बाल्मीक ने संकल्प पेश करते हुए कहा कि वेस्टर्न कोल फील्ड को दी गई जमीन की लीज निरस्त की जाए और उसका उपयोग लोकहित में किया जाए। इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि वेस्टर्न कोल्डफील्ड लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड की सहयोगी इकाई है जो कि भारत सरकार के अधीन है। ऐसी स्थिति में कोयले की लीज पर आवंटित भूमि के संबंध में कोई भी निर्णय भारत सरकार के बिना राज्य सरकार नहीं ले सकती है। उनकी वर्ष 2030 तक की लीज है। बाल्मीक ने कहा कि वर्ष 1972-73 से पहले कोयला खदानें प्रायवेट में चलती थीं और निजी क्षेत्र के मालिक इन कोयला खदानों को चलाते थे।
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने वर्ष 1972-73 में कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया। उसमें फिर पब्लिक सेक्टर में कोल इण्डिया ने इन सारी खदानों को अपने कब्जे में लेकर चलाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में जो कोयला खदानें हैं, बहुत पुरानी थीं और वे खदानें आज बंद हो गई हैं। जहां कोयला खदानें थीं वहां अण्डर ग्राउंड माइन थी और कोल प्रॉपर्टी थी। कोल प्रॉपर्टी समाप्त होने के बाद कोल इण्डिया ने क्लोजर का नोटिस जारी करके उनको बंद कर दिया।

ये कोयला खदानें हो चुकी हैं बंद…

  1. इकलहरा माइंस हह वर्ष 2000 में बंद हुई।
  2. चान्दामेटा कोयला खदान वर्ष 2000 में बंद हुई।
  3. नॉर्थ चान्दामेटा खदान वर्ष 1990 में बंद हुई है।
  4. भमोड़ी कोयला खदान वर्ष 1994 में बंद हुई है।
  5. बडक़ुई ओपन कॉस्ट वर्ष 2018 में बंद हुई है।
  6. न्यूटन कोयला खदान वर्ष 1995 में बंद हुई है।
  7. रावनवाड़ा कोयला खदान वर्ष 2010 में बंद हुई है।
  8. रावनवाड़ा खास कोयला खदान वर्ष 2012 में बंद हुई है।
  9. गनपती माइन वर्ष 2018 में बंद हुई है।
  10. गाजनडो माइन वर्ष 2008 में बंद हुई है।

इस आधार पर वापस लेने का रखा प्रस्ताव

बाल्मीक ने कहा कि सरकार लीज पर जमीन उद्योग स्थापित किए जाने या नया उद्योग लगाने के लिए देती है। यदि लीज लेने के बाद में कोयला खदानें बंद हो गईं और अब इनके लिए वह जमीन अनुपयोगी है, वहां कोई उपयोग ही नहीं हो पा रहा है तो उनको लीज को हमको वापस करना चाहिए, ये गजट में वर्ष 2021 में राजपत्र जारी हुआ है। फिर से इसको वर्ष 2030 तक के लिए रिन्यू कर दिया गया है। जब उसकी आवश्यकता नहीं थी, कोयला खदानें वहां सारी बंद हो गईं, नया कोई प्रोजेक्ट आना नहीं है, तो उनको रिन्यू क्यों किया गया। खदानें बंद हैं तो आसानी से हो सकते हैं भवन निर्माण किया जाना चाहिए।