भागीरथपुरा क्षेत्र में हाल ही में हुई जलजनित घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शारीरिक उपचार के साथ-साथ नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। नियमित उपचार और निगरानी के चलते क्षेत्र में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने अभियान स्वास्थ्यवर्धन के अंतर्गत मनोचिकित्सकीय परामर्श शिविर का आयोजन कर लोगों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की पहल की है।
मनोचिकित्सकीय शिविर में तनाव से राहत पर फोकस
शिविर के दौरान मन कक्ष दल ने नागरिकों को भय, तनाव और असुरक्षा की भावना से बाहर निकलने के व्यावहारिक उपाय बताए। टीम ने लोगों को समझाया कि अप्रत्याशित परिस्थितियों में घबराहट स्वाभाविक है, लेकिन सही परामर्श और सकारात्मक सोच से मानसिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है। इस दौरान मानसिक मजबूती बढ़ाने के लिए आवश्यक काउंसलिंग भी की गई।
अभियान स्वास्थ्यवर्धन का उद्देश्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि संपूर्ण स्वास्थ्य की अवधारणा में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तीनों पहलुओं का समावेश होता है। इसी सोच के तहत 10 जनवरी से भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र में अभियान स्वास्थ्यवर्धन की शुरुआत की गई है। अभियान के अंतर्गत गैर संचारी रोगों, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, डायरिया नियंत्रण, जांच, दवा वितरण, रेफरल और उपचार की सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सर्वे और जागरूकता से बदला नजरिया
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे दलों ने घर-घर जाकर लोगों से चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की अपील की। इस दौरान यह भी सामने आया कि आम नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े सकारात्मक व्यवहार अपनाने के लिए तैयार हैं और उन्होंने जांचों को उपयोगी बताया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
डायरिया के बाद मानसिक चिंता दूर करने की कोशिश
डायरिया के मामलों के बाद क्षेत्र में कुछ लोगों में भय और चिंता की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि अधिकांश नागरिक शारीरिक रूप से स्वस्थ हो चुके हैं, लेकिन मानसिक तनाव अभी भी कुछ लोगों में देखा जा रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए मन कक्ष दल-इंदौर द्वारा मनोचिकित्सकीय परामर्श शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 17 पुरुषों और 33 महिलाओं की स्क्रीनिंग कर उन्हें आवश्यक परामर्श दिया गया।
व्यक्तिगत मामलों में मिला लाभ
शिविर में आई 50 वर्षीय गोदावरी बाई (परिवर्तित नाम) ने लंबे समय से सिरदर्द और मानसिक परेशानी की शिकायत बताई। उन्हें दवा, काउंसलिंग और गहरी श्वास-प्रश्वास की तकनीक सिखाई गई, जिससे सत्र के बाद वे पहले से अधिक शांत और सहज नजर आईं। वहीं, क्लॉस्ट्रोफोबिया से पीड़ित गंगाबाई (परिवर्तित नाम) को मनो-शिक्षा, काउंसलिंग और आवश्यक उपचार का भरोसा दिया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास और उपचार के प्रति सकारात्मक सोच दिखाई दी।
मानसिक मजबूती की दिशा में निरंतर प्रयास
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऐसे शिविरों के माध्यम से नागरिकों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना प्राथमिकता है। आने वाले समय में भी इस तरह की गतिविधियां जारी रहेंगी, ताकि भागीरथपुरा के लोग न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकें।