खंडवा रोड सहित शहर के कई इलाकों से लगातार गंदे पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई जगहों पर नलों से ऐसा पानी आ रहा है जो न सिर्फ बदबूदार है, बल्कि उसका रंग और स्वाद भी सामान्य नहीं है। लोग मजबूरी में इस पानी का इस्तेमाल करने से डर रहे हैं, क्योंकि इससे पेट से जुड़ी बीमारियों, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बड़ी संख्या में परिवार रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए भी बोतलबंद पानी पर निर्भर हो गए हैं, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला बन चुकी है।
ऐसी स्थिति में सबसे पहला और प्रभावी कदम है अपने स्थानीय नगर पार्षद को लिखित शिकायत देना। एक औपचारिक पत्र के माध्यम से आप अपने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति, गंदे पानी से हो रही परेशानी और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का स्पष्ट उल्लेख कर सकते हैं। जब शिकायत लिखित रूप में जाती है, तो उस पर कार्रवाई की संभावना भी बढ़ जाती है। पार्षद के माध्यम से यह मुद्दा नगर निगम या संबंधित विभाग तक मजबूती से पहुंच सकता है और मौके पर जांच कराकर समस्या के स्थायी समाधान की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
इसके अलावा, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना भी एक आसान और असरदार तरीका है। केंद्र और राज्य सरकार के कई विभागीय पोर्टल मौजूद हैं, जहां पानी की सप्लाई, सीवर लाइन, लीकेज या दूषित जल से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं। ऑनलाइन शिकायत का फायदा यह है कि आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है, जिसके आधार पर आप अपनी शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। इससे संबंधित विभाग पर भी जवाबदेही बनती है कि वह तय समय में समस्या का समाधान करे।
पेयजल से जुड़ी तत्काल समस्याओं के लिए हेल्पलाइन नंबरों का सहारा लेना भी जरूरी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) या नगर निगम द्वारा जारी टोल-फ्री नंबरों पर कॉल करके आप सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, पीएचई का 18002330008 जैसे नंबरों पर संपर्क करने से आपकी शिकायत तुरंत सिस्टम में दर्ज होती है और फील्ड स्टाफ को मौके पर भेजा जा सकता है। कई बार फोन पर की गई शिकायतें तेजी से एक्शन में आ जाती हैं, खासकर जब मामला स्वास्थ्य से जुड़ा हो।
कुछ जिलों में प्रशासन ने व्हाट्सएप हेल्पलाइन की सुविधा भी शुरू की है, ताकि आम लोग आसानी से अपनी बात रख सकें। जैसे धार जिले में 6265233535 नंबर पर पेयजल से जुड़ी समस्याओं की शिकायत व्हाट्सएप के जरिए भेजी जा सकती है। इसमें आप पानी की फोटो, वीडियो या लोकेशन भी साझा कर सकते हैं, जिससे अधिकारियों को समस्या समझने में आसानी होती है और कार्रवाई भी तेज होती है। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए मददगार है, जो ऑनलाइन पोर्टल इस्तेमाल करने में असहज महसूस करते हैं।
इन सभी माध्यमों से शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग—चाहे वह नगर निगम हो या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग—को मामले का संज्ञान लेना ही पड़ता है। इसके तहत दूषित पानी की सप्लाई को तत्काल बंद करना, पाइपलाइन या टंकी की जांच करना, लीकेज या सीवेज मिक्सिंग को ठीक करना और वैकल्पिक रूप से स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी बनती है। लगातार और सामूहिक रूप से शिकायत करने पर प्रशासन पर दबाव भी बनता है, जिससे समस्या का अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान निकल सके और लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ पेयजल मिल सके।