मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को भागीरथपुरा मामले पर गरमा गया। कांग्रेस विधायकों ने भोपाल के भागीरथपुरा इलाके में हुई घटना को लेकर सदन में जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया।
सदन में क्या हुआ?
बजट सत्र शुरू होते ही कांग्रेस के विधायक वेल में उतर आए। उन्होंने भागीरथपुरा घटना पर सरकार से जवाब मांगा। विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन की कार्यवाही को बाधित किया। अध्यक्ष ने कई बार सदन को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस विधायक अपनी मांग पर अड़े रहे।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल हो चुकी है। विपक्ष ने इस मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग भी रखी।
भागीरथपुरा घटना क्या है?
भोपाल के भागीरथपुरा इलाके में हाल ही में एक गंभीर घटना सामने आई थी। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। कांग्रेस ने इसे सरकार की नाकामी का प्रतीक बताते हुए विधानसभा में उठाया। पार्टी ने पीड़ितों को न्याय दिलाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
सरकार का रुख
सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की है। सरकार पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और विपक्ष राजनीतिक स्वार्थ के लिए मामले को तूल दे रहा है।
हालांकि, कांग्रेस इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी। विपक्षी विधायकों ने कहा कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, वे सदन में विरोध जारी रखेंगे।
बजट सत्र पर असर
भागीरथपुरा मामले पर हंगामे से बजट सत्र की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई। कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य लंबित रह गए। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की और सदन की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगामी दिनों में और तेजी से उठा सकती है। बजट सत्र के दौरान विपक्ष का यह आक्रामक रुख सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।
आगे क्या?
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह भागीरथपुरा मामले को लेकर सड़क से लेकर सदन तक विरोध जारी रखेगी। पार्टी ने प्रदेशभर में इस मुद्दे पर जनजागरण अभियान चलाने की भी बात कही है। वहीं सरकार का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित कार्रवाई कर रही है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट सत्र के शेष दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है और क्या सरकार विपक्ष की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाती है।