इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर: 18 मौतें दर्ज, रहवासी पलायन को मजबूर

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण फैली महामारी ने अब जनजीवन के साथ-साथ स्थानीय आजीविका को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। इस त्रासदी ने अब तक 18 लोगों की जान ले ली है। स्वास्थ्य बिगड़ने के डर से इलाके में खौफ का माहौल है और इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों, विशेषकर खाने-पीने की दुकानों पर पड़ा है।
इलाके में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लोग पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं। बीमारी के डर से एक परिवार ने तो भागीरथपुरा छोड़कर अपने मूल शहर लौटने की तैयारी तक शुरू कर दी है। दूषित पानी के संकट ने स्थानीय निवासियों की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
खाने-पीने के धंधे पर लगा ताला
दूषित पानी की खबरों के बीच सबसे ज्यादा नुकसान उन छोटे व्यापारियों को हो रहा है, जो खानपान से जुड़े हैं। इलाके में फास्ट फूड, चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचे लगाने वालों का धंधा लगभग बंद हो चुका है। कई दिनों तक दुकानें पूरी तरह बंद रहीं।
हालांकि, अब कुछ दुकानदारों ने दुकानें खोली हैं, लेकिन ग्राहकों की संख्या न के बराबर है। लोग बाहर का कुछ भी खाने-पीने से कतरा रहे हैं। ग्राहकी ठप होने से इन छोटे व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वे अब अपनी रोजमर्रा की कमाई और खर्चों के लिए जूझ रहे हैं। दुकानदारों का मानना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों में भरोसा नहीं लौटेगा, तब तक व्यापार में सुधार की उम्मीद कम है।
अस्पतालों में अब भी भर्ती हैं 99 मरीज
प्रशासन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर में दूषित पानी के कारण बीमार हुए लोगों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है। मंगलवार रात तक की स्थिति के अनुसार, शहर के विभिन्न अस्पतालों में 99 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 16 मरीजों की हालत गंभीर है, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है और 3 मरीज वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
राहत की बात यह है कि अब तक भर्ती हुए कुल 429 मरीजों में से 330 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है।