उज्जैन महाकाल मंदिर में ‘हल्दी खेला’ पर विवाद: पुजारी बोले – “शास्त्र-विरुद्ध है, रोक लगे”

Ujjain News: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि से पहले मनाए जा रहे शिवनवरात्रि उत्सव के दौरान एक नई परंपरा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

मंदिर परिसर में महिला श्रद्धालुओं द्वारा ‘हल्दी खेला’ यानी एक-दूसरे को हल्दी लगाकर उत्सव मनाने पर मंदिर के पुजारियों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के विरुद्ध बताते हुए तत्काल इस पर रोक लगाने की मांग की है।

मंदिर प्रशासन को भी इस संबंध में शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद इस गतिविधि पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना है। यह पूरा मामला करीब एक दशक से चली आ रही एक अनौपचारिक परंपरा से जुड़ा है।

क्या है ‘हल्दी खेला’ की परंपरा?

महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि के नौ दिनों तक भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर शिव विवाह से पहले ये तैयारियां होती हैं।

इसी दौरान सुबह कोटेश्वर महादेव के पूजन के बाद मंदिर आने वाली 50 से 100 महिला श्रद्धालु इकट्ठा होती हैं। वे भजन-कीर्तन और ढोल की थाप पर नृत्य करते हुए एक-दूसरे को हल्दी लगाकर भगवान शिव के विवाह का उत्सव मनाती हैं। बताया जा रहा है कि यह सिलसिला करीब 11 साल पहले शुरू हुआ था।

पुजारियों ने क्यों जताई आपत्ति?

मंदिर के वरिष्ठ पुजारियों ने इस आयोजन को शास्त्रों के विरुद्ध बताया है। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह परंपरा एक तरह का मजाक है। शिव नवरात्रि में केवल पूजा, आराधना और संकल्प की परंपरा है। लोग इसे शिव विवाह के रूप में मानने लगे हैं, जबकि शिव पुराण और अन्य शास्त्रों में शिवरात्रि पर इस तरह हल्दी खेलने का कोई उल्लेख नहीं है। यह सनातन परंपरा के विपरीत है।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की परंपराएं घातक हो सकती हैं, इसलिए मंदिर समिति को समय रहते इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

मंदिर प्रशासन लगा सकता है रोक

पुजारियों की आपत्ति और अन्य शिकायतों के बाद मंदिर प्रशासन भी हरकत में आ गया है। प्रशासन को शिकायत मिली है कि मंदिर परिसर में परंपरा के विपरीत गतिविधियां हो रही हैं। मंदिर प्रशासक ने संकेत दिए हैं कि इस पर जल्द ही रोक लगाई जा सकती है। उम्मीद है कि इस संबंध में जल्द ही एक आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा।

मंदिर की मूल परंपरा क्या है?

दरअसल, मंदिर में नौ दिनों तक भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार होता है और परिसर में स्थित कोटेश्वर महादेव को उबटन अर्पित करने की परंपरा है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान को दूल्हे के रूप में सजाकर सेहरा चढ़ाया जाता है। इसी से प्रेरित होकर श्रद्धालुओं ने इसे शिव विवाह उत्सव के रूप में मनाना शुरू कर दिया, जो अब ‘हल्दी खेला’ तक पहुंच गया है।