26 मार्च 2025 को उपायुक्त कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें अपर आयुक्त स्वास्थ्य स्थापना अनिल बनवारिया, उपायुक्त के. एस. सगर और स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इस बैठक में लोकायुक्त की 89 फाइलों पर चर्चा हो रही थी। चर्चा के दौरान, झोन 15 के स्वास्थ्य अधिकारी गौतम भाटिया और झोन 14 के स्वास्थ्य अधिकारी अवध नारायण सिंह, साथ ही सीएसआई मिश्रा और अन्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
इसी बीच, शहरी गरीबी उपशमन प्रकोष्ठ के प्रभारी और एमआईसी सदस्य मनीष शर्मा (मामा) ने सायं 5:05 बजे उपायुक्त कार्यालय में प्रवेश किया और आते ही अपर आयुक्त और उपायुक्त से तीखी आवाज में बात करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “आपको बुलाया जाता है तो आप आते नहीं हो, क्या बार-बार फोन लगाना पड़ेगा, क्या आप लोग अपनी भाषा में समझने की कोशिश करते हो? क्या चोरी-चकारी चल रही है?” इसके बाद, उन्होंने अपर आयुक्त से भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया और धमकी दी कि “तुम मेरी बात नहीं सुनते हो, मैं तुम्हें इस विभाग से हटा दूंगा।”
लीलाधर करोसिया, जो उस समय युनियन के नेता के रूप में मौजूद थे, ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए मनीष शर्मा को कहा कि “यहां युनियन भी बैठी है और कर्मचारी हितों पर चर्चा चल रही है, कृपया अपनी भाषा संभालकर बोलें।” इसके बाद, मनीष शर्मा शांत हुए और वहां से चले गए।
इस घटना के बाद, अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस अभद्र व्यवहार को लेकर गंभीर चिंता जताई। अधिकारियों का कहना है कि वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और लगन से कार्य करते हैं, लेकिन इस प्रकार के अमानवीय व्यवहार ने उनकी कार्यप्रणाली और प्रतिष्ठा को गंभीर ठेस पहुँचाई है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में शहरी गरीबी उन्मूलन प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय आजीविका मिशन (एनयूएलएम) विभाग में कार्य करना अब संभव नहीं है।
अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लेकर उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस प्रकार के व्यवहार से विभाग में कर्मचारियों का मनोबल गिरता है और कार्य में बाधा उत्पन्न होती है।