अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक ऐसा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है जिसने निवेशकों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। सोमवार को जहां ब्रेंट क्रूड $117 प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को छू गया था, वहीं मंगलवार को इसमें 10% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे कीमतें $85.15 के आसपास आ गईं।
क्यों आई कीमतों में यह ‘ऐतिहासिक’ गिरावट?
इस अचानक आई गिरावट के पीछे मुख्य रूप से भू-राजनीतिक मोर्चे पर मिल रहे शांति के संकेतों को माना जा रहा है:
ट्रंप का ‘शांति’ संकेत: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने बाजार का मूड बदल दिया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को जल्द ही बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।
पुतिन-ट्रंप वार्ता: रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप के बीच हुई फोन कॉल ने भी आग में पानी डालने का काम किया है। इस बातचीत को मिडिल ईस्ट और वैश्विक संघर्षों को शांत करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
सप्लाई चेन का डर हुआ कम: सोमवार को होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका से जो पैनिक (Panic) फैला था, वह कूटनीतिक हलचलों के बाद अब शांत होता दिख रहा है।
भारत में एलपीजी सप्लाई पर क्या होगा असर?
वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत सरकार और तेल कंपनियों ने कमर कस ली है। भारत पेट्रोलियम (BPCL) के अनुसार, सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
घरेलू सेक्टर को प्राथमिकता: आम जनता को गैस की कमी न हो, इसके लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। अस्पताल और स्कूलों जैसे जरूरी संस्थानों को बिना किसी रुकावट के गैस मिलती रहेगी।
गैर-घरेलू मांग के लिए कमेटी: चूंकि गैर-घरेलू एलपीजी काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए IOCL, BPCL और HPCL के अधिकारियों की एक विशेष कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी तय करेगी कि औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को कितनी गैस आवंटित की जाए, ताकि घरेलू सप्लाई पर आंच न आए।
कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर है। अगर कीमतें $85 के स्तर पर टिकी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में स्थिरता की उम्मीद की जा सकती है।