इंदौर में 7-8 फरवरी को CVIC इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी समिट 2026, देशभर के विशेषज्ञ होंगे शामिल

इंदौर में 7 और 8 फरवरी 2026 को CVIC इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी समिट का आयोजन होने जा रहा है। सेंटर ऑफ वैस्कुलर एंड इंटरवेंशनल केयर (CVIC) द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन इरकाड इंडिया, अरबिंदो कैंपस में होगा।

इंडियन सोसाइटी ऑफ वैस्कुलर एंड इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी (ISVIR) समर्थित इस समिट का मकसद मध्य भारत में मिनिमली इनवेसिव इलाज को बढ़ावा देना है। तेज, सुरक्षित और कम दर्द वाले उपचार की बढ़ती मांग को देखते हुए यह आयोजन किया जा रहा है।

कौन-कौन होंगे शामिल

इस समिट में देशभर से इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोइंटरवेंशनिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट भाग लेंगे। वास्कुलर सर्जन, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट भी मौजूद रहेंगे। एंडोवैस्कुलर विशेषज्ञ, फेलो और युवा कंसल्टेंट्स को भी आमंत्रित किया गया है।

आयोजन का उद्देश्य डॉक्टरों को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे मरीजों को बिना बड़े ऑपरेशन के बेहतर इलाज मिल सकेगा।

प्री-कॉन्फ्रेंस हैंड्स-ऑन वर्कशॉप

7 फरवरी को मुख्य समिट से पहले एडवांस एंडोवैस्कुलर स्किल्स लैब आयोजित होगी। तीन समानांतर वर्कशॉप हॉल में रोटेशनल लर्निंग के जरिए ट्रेनिंग दी जाएगी। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में रियल-टाइम प्रैक्टिकल सेशन होंगे।

प्रत्येक बैच में सीमित प्रतिभागियों को अधिकतम हैंड्स-ऑन अनुभव मिलेगा। इस वर्कशॉप की रजिस्ट्रेशन फीस ₹5,000 है। इसमें आवास और भोजन की सुविधा शामिल है।

विशेषज्ञों ने क्या कहा

“मध्य भारत में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है। बड़े शहरों में ये तकनीकें नियमित रूप से इस्तेमाल हो रही हैं। हमारा उद्देश्य है कि इंदौर जैसे शहरों में भी विश्वस्तरीय प्रशिक्षण मिले।” — डॉ. निशांत भार्गव, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, CVIC इंदौर

डॉ. भार्गव ने बताया कि लाइव केस डिस्कशन और एक्सपर्ट इंटरैक्शन के जरिए प्रैक्टिकल स्किल्स सिखाई जाएंगी। मरीजों को कम दर्द और कम समय में बेहतर इलाज मिल सकेगा।

“इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ने इलाज की परिभाषा बदल दी है। स्ट्रोक, वैरिकोस वेन, ट्यूमर और फाइब्रोइड का उपचार अब छोटे पंचर से संभव है।” — डॉ. आलोक उडिया, एंडोवैस्कुलर स्पेशलिस्ट

डॉ. उडिया ने कहा कि अब न बड़ा चीरा लगता है और न लंबा अस्पताल में रहना पड़ता है। समिट में लेटेस्ट डिवाइस और जटिल मामलों के समाधान साझा किए जाएंगे।

“आईआर तकनीक में मरीज की रिकवरी बेहद तेज होती है। ज्यादातर प्रक्रियाओं में मरीज उसी दिन या अगले दिन घर जा सकता है।” — डॉ. शैलेश गुप्ता, सीनियर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट

डॉ. गुप्ता ने बताया कि इससे संक्रमण का खतरा और खर्च दोनों कम होते हैं। समिट का लक्ष्य इस सुविधा को महानगरों से बाहर आम जनता तक पहुंचाना है।

समिट में कौन से विषय होंगे

दो दिनों में विभिन्न विशेषज्ञ सत्र आयोजित होंगे। न्यूरो इंटरवेंशन में एनेयूरिज्म कोइलिंग और थ्रोम्बेक्टॉमी पर चर्चा होगी। कैरोटिड स्टेंटिंग और हेपेटोबिलियरी इंटरवेंशन भी शामिल हैं।

किडनी और डायलिसिस एक्सेस प्रक्रियाओं पर सेशन होंगे। पेरिफेरल वैस्कुलर इंटरवेंशन और एम्बोलाइज़ेशन तकनीकों पर विस्तार से बात होगी। थायरॉयड एब्लेशन, प्रोस्टेट और वीनस इंटरवेंशन पर भी लाइव केस डिस्कशन होंगे।

मध्य भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण

इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी मिनिमली इनवेसिव इलाज का आधुनिक तरीका है। इसमें बड़े ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती। कैथेटर और इमेजिंग तकनीक से इलाज किया जाता है।

अब तक यह सुविधा मुख्यतः महानगरों तक सीमित थी। इस समिट के जरिए मध्य भारत के डॉक्टरों को अपडेट किया जाएगा। इससे क्षेत्र के मरीजों को भी आधुनिक इलाज मिल सकेगा।

यह समिट इलाज को सुरक्षित, सटीक और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डॉक्टरों को अत्याधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करने पर जोर रहेगा।