MP के इस शहर को मिलेगी जाम से मुक्ति, 152 करोड़ से बनेगा रिंग रोड–फ्लाईओवर

दमोह जिले के निवासियों और पथरिया मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। शहर के व्यस्त पथरिया मार्ग पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग क्रमांक 56 पर अक्सर लगने वाले जाम से जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने यहां रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाने की प्रक्रिया को गति दे दी है।

विभाग ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, इस ओवरब्रिज के निर्माण पर लगभग 37.95 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। टेंडर भरने की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही निर्माण कार्य को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो जाएगी।

जाम से मिलेगी स्थायी मुक्ति

दमोह से सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना जैसे प्रमुख जिलों को जोड़ने वाला यह मार्ग बेहद व्यस्त रहता है। पथरिया फाटक पर अक्सर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही के कारण फाटक बंद रहता है। इससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार एंबुलेंस और स्कूल बसें भी इस जाम में फंसी नजर आती हैं। ओवरब्रिज बनने से यातायात सुगम होगा और लोगों का कीमती समय बचेगा।

रिंग रोड परियोजना को भी मिली मंजूरी

शहर के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए केवल ओवरब्रिज ही नहीं, बल्कि एक बड़ी रिंग रोड परियोजना पर भी काम चल रहा है। करीब 750 करोड़ रुपये की लागत वाली इस रिंग रोड परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। यह रिंग रोड 14 किलोमीटर लंबी होगी, जो शहर के बाहरी हिस्से से गुजरेगी।

इस परियोजना के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। रिंग रोड बनने से भारी वाहन शहर के भीतर प्रवेश किए बिना ही बाहर निकल जाएंगे, जिससे शहर के अंदरूनी यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। प्रशासन का प्रयास है कि इन दोनों परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि नागरिकों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

तकनीकी पहलू और समय सीमा

प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज की लंबाई और चौड़ाई को भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ महीनों में मौके पर निर्माण कार्य दिखाई देने लगेगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस स्वीकृति को क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताया है।