दशामाता का व्रत हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को बड़े श्रद्धा भाव से किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए है, जो अपने घर की सुख-शांति और समृद्धि के लिए इसे करती हैं। इस दिन विशेष रूप से दिशा सुधारने का महत्व है, और माना जाता है कि इस व्रत को करने से जीवन की सारी परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं। तो चलिए जानते हैं 2025 में दशामाता व्रत की सही तारीख, पूजा विधि और उसके लाभ के बारे में।
दशामाता का ऐसे करते है पूजन
इस साल दशामाता का व्रत 24 मार्च 2025, सोमवार को रखा जाएगा। यह व्रत चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि तक चलता है, जो इस साल 15 मार्च 2025 से प्रारंभ हुआ था। मुख्य पुजा 24 मार्च को दशमी तिथि पर पूजा की जाती है।
दशामाता पूजा विधि
1. डोरा तैयार करना:
सबसे पहले, सौभाग्यवती महिलाएं 10 तारों का कच्चा सूत लेकर उसमें 10 गांठ लगाती हैं और उसे हल्दी से रंगती हैं।
2. पीपल वृक्ष की पूजा:
फिर पीपल वृक्ष की प्रदक्षिणा की जाती है और उसे पूरी श्रद्धा से पूजा जाता है।
3. नल-दमयंती कथा:
पूजा के बाद, पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर महिलाएं नल-दमयंती की कथा सुनती हैं, जो व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
4. डोरा बांधना:
कथा सुनने के बाद महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और डोरा गले में बांध लेती हैं।
5. द्वार पर हल्दी कुमकुम के छापे:
पूजा के बाद महिलाएं अपने घर के द्वार के दोनों तरफ हल्दी और कुमकुम के छापे लगाती हैं।
6. व्रत में नियम:
इस दिन नमक का सेवन नहीं किया जाता और पूरे दिन व्रत रखकर देवी मां से आशीर्वाद लिया जाता है।
दशामाता व्रत के लाभ
• इस व्रत को करने से घर की खराब दशा सुधरती है।
• यह व्रत धन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।
• घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
• इसे करने से जीवन की सारी परेशानियाँ और विपत्तियाँ समाप्त हो जाती हैं।
दशामाता का व्रत एक साधारण सा व्रत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समृद्धि और धार्मिक पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन को श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाने से जीवन में खुशियाँ और समृद्धि आती हैं।