प्रखर – वाणी
आखिर लम्बे इंतज़ार के बाद सुमित मिश्रा को भाजपा का नगराध्यक्ष बनाया…समर्पित कार्यकर्ता निरन्तर कर्मरत रहे तो पार्टी उसका ख्याल रखती है ये जताया…वर्षों से सतत संगठन के अभियानों में जुटे रहने वाले सुमित नैराश्य की तरफ बढ़ रहे थे…लगातार अनेक सक्रिय चहल कदमी के साथ क्रमशः ऊंचाइयों पर चढ़ रहे थे…अक्सर उनकी झोली में पद आते आते सरक जाया करता था…सुमित का मन भी व्याकुल था मगर हौसला भर जाया करता था…
हाल ही में मुक्तिधाम पर एक समूह के बीच सुमित बोला…जिसका भी करना है कर दो बीपी मत बढाओ इस बात के साथ मुख खोला…सचमुच सुमित की ये नई जिम्मेदारी तो इंदौर की वक्ता बिरादरी के भीष्मपितामह स्व.उमेश शर्मा को सच्ची श्रद्धांजलि है…उन्होंने भी पार्टी की खूब तपस्या की और सुमित को भी आगे बढ़ाया यही उनके चरणों में समर्पित भावांजलि है…सुमित मिश्रा जमीनी कार्यकर्ता रहकर विभिन्न जिम्मेदारियों के सफल निर्वहन का अनुभव रखते है…
अपने साथियों के लिए अड़कर – लड़कर कुशल संगठक के गुणों का कर्म सम्भव रखते है…इंदौर की आगामी राजनीति की दिशा व दशा पर अपनी पैनी निगाह व रचनात्मक सोच का फायदा देंगे…युवाओं में पार्टी लाइन से कार्य करने हेतु उपकृत होने वाला कायदा देंगे…अनेक पद सुमित की तश्तरी में आकर फिसल गए…राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दुष्परिणाम कितने ही अरमान मसल गए…बड़े ही सामान्य परिवार और संघर्ष के पर्याय बनकर सुमित ने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की…
एक – एक प्रकल्प की सफल – सार्थक पूर्णता से अपनी कर्मठता लकीर लघु से गुरु की…वक्तृत्व कौशल में निपुण और वाचाल होने की वजह से कुछ लोगों को खलता भी रहा…सुमित खरी खरी कहने का माद्दा रखता है इसलिए सतपथ पर चलता भी रहा…दादा दयालु का वरदहस्त , कर्मठ व कार्यकुशल व्यवहार और निर्भीक छवि सुमित की ताकत रही…अनेक बड़े नेताओं का दिल जीतकर उनके साथ घुलमिल जाने और उनके हृदय के भाव समझने की नजाकत रही…अपने माता – पिता का दिव्य आशीष और उनकी कृपा का सदैव सच्चा पात्र रहे…जिन्होंने परिवार , समाज फिर देश की चिंता नहीं की सुमित की दृष्टि में वे अपात्र रहे…सरल , सहज , दृढ़ , यारबाज , जुझारू , जांबाज , सटीक , तार्किक , सहयोगी , भावुक और सहृदय गुण सुमित का व्यक्तित्व हैं…
अपनों की खातिर मैदान पकड़ना , डटना पीछे नहीं हटना यही विराट कृतित्व है…समय की रफ्तार को पछाड़कर सुमित यश के धवल शिखर पर चढो…भाजपा जैसे दिव्य संगठन के नगर मुखिया बनकर नया इतिहास गढ़ो…नवपीढ़ी उम्मीद की टकटकी लगाकर तुम्हारे हर कदम को निहार रही है…कुछ ऐसा कर दो जिससे माँ अहिल्या का स्वप्न साकार हो जनता पुकार रही है…श्यामाप्रसाद मुकर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सपनों का संगठन खड़ा करो…नौजवान ताकतों में सक्रियता का शंख फूंक ऊर्जाएं भरो…