दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, निजी स्कूलों की मनमानी पर नकेल, 15% अभिभावकों की शिकायत पर होगी सीधी कार्रवाई

दिल्ली के अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने की शिकायतों पर अब दिल्ली सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि फीस बढ़ोतरी और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर अब स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी। नए नियमों के तहत, अगर किसी स्कूल के खिलाफ 15 प्रतिशत अभिभावक शिकायत करते हैं, तो सरकार उस स्कूल के खिलाफ सीधी कार्रवाई शुरू कर सकती है。

अक्सर देखा गया है कि निजी स्कूल बिना किसी ठोस कारण के फीस में बढ़ोतरी कर देते हैं। इससे अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। दिल्ली सरकार के इस फैसले का उद्देश्य इसी मनमानी पर लगाम लगाना है। शिक्षा निदेशालय के अनुसार, यदि किसी स्कूल में पढ़ने वाले कुल छात्रों के 15 प्रतिशत अभिभावक फीस या अन्य शुल्कों को लेकर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

फीस वृद्धि पर नकेल और ऑडिट के आदेश

इस नई व्यवस्था के तहत, शिकायत मिलने पर सरकार संबंधित स्कूल के खातों का ऑडिट करवा सकती है। यह जांच की जाएगी कि स्कूल ने फीस बढ़ाने का जो निर्णय लिया है, वह नियमों के अनुरूप है या नहीं। यदि ऑडिट में यह पाया जाता है कि स्कूल ने अनुचित लाभ कमाने के लिए फीस बढ़ाई है, तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इसके अलावा, स्कूलों को अपने वित्तीय विवरणों में पारदर्शिता भी बरतनी होगी।

अभिभावकों को मिलेगी राहत

दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है। कई बार अभिभावक संघ और सरकार के बीच इसे लेकर चर्चाएं होती रही हैं। पहले इक्का-दुक्का शिकायतों पर कार्रवाई करना मुश्किल होता था, लेकिन अब एक निश्चित प्रतिशत तय होने से अभिभावकों की आवाज को बल मिलेगा। यह कदम न केवल स्कूलों को जवाबदेह बनाएगा, बल्कि शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने में भी मददगार साबित होगा।

शिकायत प्रक्रिया होगी पारदर्शी

सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि शिकायत की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो। अभिभावक अपनी शिकायतें शिक्षा निदेशालय के पास दर्ज करा सकेंगे। विभाग इन शिकायतों का विश्लेषण करेगा और यदि शिकायतकर्ताओं की संख्या निर्धारित 15 प्रतिशत के आंकड़े को छूती है, तो जांच की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी जाएगी। यह फैसला दिल्ली के हजारों परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा जो हर साल बढ़ती स्कूल फीस से परेशान रहते हैं।