देश की राजधानी दिल्ली में कड़ाके की ठंड और कोहरे के साथ-साथ प्रदूषण ने भी आम जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राजधानी के कई इलाकों में AQI का स्तर 400 के पार दर्ज किया गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
इस जहरीली हवा से निपटने के लिए सरकार अब वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है। विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) को लेकर नियमों में बड़ी सख्ती की जा रही है। अब पीयूसी सर्टिफिकेट न होने पर चालान से बचने के पुराने रास्ते बंद किए जाएंगे।
AQI की स्थिति गंभीर, सांस लेना हुआ मुश्किल
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई हॉटस्पॉट इलाकों में हवा बेहद जहरीली हो चुकी है। आनंद विहार में AQI 466, जहांगीरपुरी में 447, अशोक विहार में 444 और द्वारका में 440 दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद सख्त कदम उठाने का फैसला लिया गया है।
अब 100 रुपये में नहीं छूटेगा पीछा
हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में पीयूसी सर्टिफिकेट को लेकर कड़े फैसले लिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में एक बड़ी खामी है। अब तक अगर किसी वाहन चालक का पीयूसी नहीं होता था, तो चालान कटने के बाद वे लोक अदालत का रुख करते थे। वहां महज 100 रुपये का जुर्माना भरकर वे अपना चालान माफ करवा लेते थे।

सरकार का मानना है कि इस ‘सस्ते जुर्माने’ के कारण लोग पीयूसी बनवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है, क्योंकि अनफिट वाहन सड़कों पर धुआं उगल रहे हैं।
सीधे 10,000 रुपये का चालान होगा वसूल
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अब सरकार ने तय किया है कि पीयूसी न होने पर किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत लोक अदालत के जरिए सस्ते में छूटने का विकल्प खत्म किया जा रहा है। अब नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को पूरा 10,000 रुपये का चालान भरना होगा।
अधिकारियों के मुताबिक, इस सख्ती का मकसद सिर्फ राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि लोगों को यह संदेश देना है कि पर्यावरण नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं होगी। जब चालान की राशि बड़ी होगी, तो लोग समय पर पीयूसी रिन्यू करवाने के लिए मजबूर होंगे।
जल्द लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव को लागू करने की कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं पर काम कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इसे औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया जाएगा। प्रशासन को भरोसा है कि इस एक कदम से पीयूसी बनवाने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा और राजधानी की आबोहवा को सुधारने में मदद मिलेगी।