दिल्ली में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार ने कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। राजधानी की आबोहवा को सुधारने के लिए पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कई अहम फैसलों का ऐलान किया है। अब दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर बिना वैध ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ (PUC) सर्टिफिकेट के वाहन चालकों को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा।
प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को तेज करते हुए सरकार ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर लगाम लगाने का फैसला किया है। इसके लिए 25 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर पीयूसी जांच अनिवार्य कर दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे लोग अपने वाहनों के प्रदूषण स्तर की जांच कराने के लिए बाध्य होंगे, जिससे सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों से निकलने वाले धुएं में कमी आएगी।
सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम
वाहनों की संख्या कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए भी नए नियम जारी किए हैं। सरकारी दफ्तरों में अब 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय आकर काम करेंगे, जबकि बाकी 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम (Work From Home) करेंगे।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह नियम फिलहाल सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा, लेकिन निजी दफ्तरों को भी इसी तरह के कदम उठाने की सलाह दी गई है। इसका मकसद सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करना और ट्रैफिक जाम से होने वाले प्रदूषण को घटाना है।
निजी संस्थाओं के लिए भी एडवाइजरी
बैठक के बाद मंत्री ने स्पष्ट किया कि निजी कंपनियों और दफ्तरों के लिए भी एडवाइजरी जारी की जाएगी। सरकार चाहती है कि प्राइवेट सेक्टर भी प्रदूषण कम करने में भागीदारी निभाए। निजी कार्यालयों से अपील की गई है कि वे भी अपने यहां 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का मॉडल अपनाएं और कर्मचारियों के लिए शटल बस सेवा शुरू करें ताकि निजी वाहनों का इस्तेमाल कम हो सके।
बस और मेट्रो सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर
प्रदूषण के दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बस और मेट्रो सेवाओं की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। गोपाल राय ने बताया कि लोगों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु 500 अतिरिक्त पर्यावरण बसें चलाई जाएंगी। इसके अलावा, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से भी मेट्रो के फेरे बढ़ाने का अनुरोध किया गया है ताकि यात्रियों को भीड़ का सामना न करना पड़े।
ग्रेप (GRAP) के तहत पाबंदियां लागू
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के गिरते स्तर को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई पाबंदियां पहले ही लागू की जा चुकी हैं। निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। साथ ही, धूल उड़ने से रोकने के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले हॉटस्पॉट की निगरानी के लिए विशेष टीमें भी गठित की हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का स्तर बेहद खराब श्रेणी में पहुंच जाता है। पराली जलाने की घटनाओं और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के कारण हवा जहरीली हो जाती है, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।