Ujjain News: विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब बड़े बदलाव होने की तैयारी देखी जा रही है। मंदिर की संवेदनशीलता और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब यहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) या अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग तेज हो गई है।
आम श्रद्धालुओं से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, सभी का मानना है कि मंदिर की सुरक्षा को और अधिक हाई-टेक और सुदृढ़ करने का यह सही समय है।
सांसद फिरोजिया की पहल: दिल्ली तक गूँजी मांग
उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उज्जैन एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है और महाकाल मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है।
उन्होंने सुरक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कुछ प्रमुख कारण गिनाए:
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अपराधियों की धरपकड़: पूर्व में मंदिर परिसर से कुख्यात अपराधी विकास दुबे जैसे संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं।
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संवेदनशीलता: मंदिर की भौगोलिक और धार्मिक स्थिति इसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती है।
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आगामी सिंहस्थ: भविष्य में होने वाले सिंहस्थ महापर्व में जुटने वाली भारी भीड़ के प्रबंधन के लिए अभी से एक मजबूत सुरक्षा ढांचे की जरूरत है।
श्रद्धालुओं और संतों का व्यापक समर्थन
मंदिर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों का कहना है कि वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश है। केंद्रीय बलों के आने से न केवल अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि वीआईपी मूवमेंट और सामान्य दर्शनार्थियों के बीच बेहतर तालमेल भी स्थापित हो सकेगा। राज्यसभा सांसद संत उमेशनाथ महाराज ने भी इस मुद्दे को सदन में उठाकर सुरक्षा की मांग को धार्मिक और सामाजिक मजबूती प्रदान की है।
केंद्र की टीम कर चुकी है निरीक्षण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सांसद फिरोजिया के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस मांग को प्राथमिकता पर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक विशेष टीम उज्जैन का दौरा कर मंदिर परिसर का बारीकी से निरीक्षण भी कर चुकी है। इस दौरान जिला प्रशासन के साथ सुरक्षा मानकों की समीक्षा की गई।
“मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जिला प्रशासन की भी यही मंशा है कि मंदिर परिसर पूरी तरह सुरक्षित रहे। केंद्र सरकार की रिपोर्ट सकारात्मक रही तो जल्द ही महाकाल मंदिर की सुरक्षा की कमान केंद्रीय बलों के हाथों में होगी।