इंदौर : आज चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन है। इसी अवसर पर इंदौर के प्राचीनतम और सबसे प्रसिद्ध देवी मंदिर में से एक बिजासन माता मंदिर में बड़ी सख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। बिजासन माता मंदिर में देवी के नौ स्वरुप पिंडी रुप में विराजमान है। यह मंदिर एक हजार साल पुराना माना जाता है। वर्ष 1760 में इंदौर के महाराजा शिवाजीराव होलकर ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। पहले मातारानी चबूतरे पर विराजमान थी। बिजासन माता को सौभाग्य और संतानदायिनी माना जाता है। नवविवाहित जोड़े यहां संतान की मनोकामना लेकर आते है।
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संतान की कामना लेकर आते नवविवाहित जोड़े
ये मंदिर शहर के पश्चिम क्षेत्र में इंदौर रेलवे स्टेशन से करीब 10 किलोमीटर दुर एयरपोर्ट के पास एक छोटी सी पहाड़ी पर वन क्षेत्र में स्थित है। बिजासन माता मंदिर के पास एक तालाब भी है, जो कभी भी सूखता नहीं है चाहे कितनी भी गर्मी क्यो ना हो। यहां वन क्षेत्र में कभी काले हिरण पाए जाते थे। मंदिर के आसपास 12 अन्य छोटे मंदिर भी बने हुए है जहां श्रद्धालु देवी के अलग-अलग स्वरुपो के दर्शन कर सकते है। वहीं बिजासन माता मंदिर में विवाह के बाद नवविवाहित जोड़े मातारानी के दर्शन करके मंदिर में बच्चे की मनोकामना करते हुए धागा भी बांधते है।
महाराजा शिवाजीराव होलकर ने की थी मन्नत
मान्यता है कि इंदौर के महाराजा शिवाजीराव होलकर ने संतान के लिए इस मंदिर में मन्नत की थी। संतान प्राप्ति होने के बाद उन्होने मंदिर का निर्माण कराया था। साथ ही कहा जाता है कि आल्हा-उदल जब इस रास्ते से युद्ध के लिए जाते थे तो वे यहां पड़ाव डालते थे और मातारानी की पूजा भी करते थे। वैसे तो पूरे तो साल भर मंदिर में भक्तो की भीड़ रहती है लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दिनो में मंदिर मे मेले का आयोजन होता है। नवरात्रि के इन नौ दिनो में मंदिर मे भक्तो का तांता लगा रहता है। बिजासन माता के मंदिर में न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और आसपास के राज्यो से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है।