भोजशाला में बसंत पर्व की शुरुआत, हवन-यज्ञ से हुआ पूजन अनुष्ठान, निर्धारित समय पर नमाज भी अदा होगी

धार, मध्य प्रदेश। ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार सुबह से तीन दिवसीय ‘माँ वाग्देवी प्राकट्योत्सव’ यानी वसंतोत्सव की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर यज्ञशाला में हवन कुंड प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना और यज्ञ का शुभारंभ किया गया। दिन शुक्रवार होने के कारण, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी दोपहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुमे की नमाज़ अदा की।

यह आयोजन हर साल वसंत पंचमी के अवसर पर होता है, लेकिन इस बार शुक्रवार पड़ने से प्रशासन ने शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है।

यज्ञ और मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर

सुबह होते ही हिंदू समाज के लोग भोजशाला परिसर में एकत्रित हुए। विधि-विधान के साथ यज्ञ कुंड को प्रज्ज्वलित किया गया और मंत्रोच्चार के साथ तीन दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, पूजा-अर्चना में शामिल हुईं। ASI के नियमों के मुताबिक, हिंदुओं को सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक पूजा करने की अनुमति दी गई थी।

शांतिपूर्ण माहौल में अदा हुई नमाज़

दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच का समय मुस्लिम समाज के लिए नमाज़ के लिए निर्धारित किया गया था। तय समय पर मुस्लिम समुदाय के लोग भोजशाला पहुंचे और उन्होंने परिसर के पिछले हिस्से में नमाज़ अदा की। इस दौरान प्रशासन ने दोनों समुदायों के बीच किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे। नमाज़ के बाद मुस्लिम समाज के लोग शांतिपूर्वक वहां से रवाना हो गए।

प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

धार जिला प्रशासन और पुलिस ने इस संवेदनशील मौके पर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए व्यापक तैयारी की थी। भोजशाला के आसपास के क्षेत्र में बैरिकेडिंग की गई और आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जा रही थी। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर पूरी स्थिति की निगरानी करते रहे। दोनों समुदायों ने शांति और सौहार्द के साथ अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली।