Dhar News : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर सुर्खियों में है। आगामी 23 जनवरी को बसंत पंचमी का पर्व और शुक्रवार एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस संयोग को देखते हुए प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
हिंदू समाज ने इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की अनुमति मांगी है, जबकि मुस्लिम समाज दोपहर में जुमे की नमाज के लिए निर्धारित समय चाहता है।
दोनों पक्षों की मांगों के बीच शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। इस बीच, सबकी निगाहें देश की सर्वोच्च अदालत पर टिकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को अहम सुनवाई
भोजशाला में पूजा के अधिकार को लेकर ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा दायर याचिका में बसंत पंचमी के अवसर पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्बाध पूजा की अनुमति मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है और इस पर 22 जनवरी को सुनवाई होनी है। कोर्ट का यह फैसला ही तय करेगा कि 23 जनवरी को भोजशाला परिसर में पूजा और नमाज की अंतिम व्यवस्था क्या होगी।
दिग्विजय सिंह ने की संयम की अपील
इस संवेदनशील मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और जिला प्रशासन से संयम और संतुलन बनाए रखने का आग्रह किया है। दिग्विजय सिंह ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पुराने आदेशों का हवाला दिया है। “वर्ष 2003, 2013 और 2016 में एएसआई द्वारा जारी आदेशों में यह स्पष्ट है कि जब भी बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ते हैं, तब पूजा और नमाज दोनों के लिए समय का निर्धारण पहले से तय है।” — दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री
क्या है समय निर्धारण की पुरानी व्यवस्था?
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, एएसआई के पुराने आदेशों के तहत ऐसी स्थिति में समय को विभाजित किया जाता रहा है। इसके मुताबिक, बसंत पंचमी पर पूजा सूर्योदय से दोपहर तक और फिर शाम 3:30 बजे से सूर्यास्त तक कराई जाती है। वहीं, दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक का समय जुमे की नमाज के लिए आरक्षित रहता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, उन्होंने असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। प्रशासन फिलहाल 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से आने वाले निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहा है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।