धार भोजशाला विवाद: ASI सर्वे रिपोर्ट पर आज हाईकोर्ट में अहम सुनवाई

Indore News: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और विवादित धार भोजशाला मामले में आज, सोमवार (16 मार्च, 2026) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में एक निर्णायक सुनवाई होने जा रही है। आज की सुनवाई का मुख्य केंद्र बिंदु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पेश की गई वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर विभिन्न पक्षों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियां और सुझाव होंगे।
क्या है आज की सुनवाई का मुख्य एजेंडा?
पिछली सुनवाई (23 फरवरी) के दौरान, जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे एएसआई की विस्तृत रिपोर्ट का अध्ययन करें और दो सप्ताह के भीतर अपनी लिखित प्रतिक्रिया दें।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि चूंकि रिपोर्ट की प्रतियां सभी पक्षों को पहले ही मिल चुकी हैं, इसलिए इसे दोबारा कोर्ट में ‘अनसील’ करने की आवश्यकता नहीं है। आज इन्हीं दाखिल जवाबों के आधार पर माननीय न्यायालय मामले की अगली दिशा तय करेगा।
एएसआई की 98 दिनों की जांच में क्या निकला?
हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से शुरू हुए लगभग 100 दिनों के सर्वे में आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञों की मदद ली गई थी। रिपोर्ट के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
  • शिलालेखों का खजाना: परिसर में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेख मिले हैं। इनमें संस्कृत, प्राकृत और नागरी लिपि के साथ-साथ अरबी और फारसी के लेख भी शामिल हैं।
  • धार्मिक और शैक्षिक प्रमाण: रिपोर्ट में ‘पारिजातमंजरी-नाटिका’ और ‘अवनिकर्मसातम’ जैसे संस्कृत ग्रंथों के उल्लेख मिले हैं, जो इसके शिक्षण केंद्र होने की ओर इशारा करते हैं। वहीं, 56 अरबी-फारसी शिलालेखों में दुआएं और धार्मिक नाम अंकित हैं।
  • बनावट में बदलाव: विशेषज्ञों ने पाया कि कुछ पत्थरों पर मूल लिखावट को मिटाकर उन्हें दोबारा इस्तेमाल किया गया है।
  • मिश्रित संस्कृति: एएसआई का निष्कर्ष है कि यह स्थल अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
कानूनी पेच और स्थानांतरण
यह मामला हाल ही में प्रशासनिक कारणों से जबलपुर की मुख्य पीठ को स्थानांतरित किया गया था, लेकिन चीफ जस्टिस ने प्रकरण की संवेदनशीलता और स्थानीय संदर्भ को देखते हुए इसे पुनः इंदौर खंडपीठ को वापस भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी जनवरी में इस मामले की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी है।
विशेष नोट: हिंदू पक्ष (हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस) और मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी) दोनों ने ही रिपोर्ट के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी दलीलें तैयार की हैं। जहां एक पक्ष इसे ‘सरस्वती मंदिर’ के ठोस प्रमाण मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे सदियों पुरानी मस्जिद बताकर यथास्थिति बनाए रखने की मांग कर रहा है।
आज की कार्यवाही से यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या कोर्ट रिपोर्ट को अंतिम साक्ष्य के रूप में स्वीकार करेगा या किसी अतिरिक्त स्पष्टीकरण की मांग की जाएगी।