धार भोजशाला विवाद की सुनवाई: आज हाईकोर्ट में खुलेगी ASI की सीलबंद सर्वे रिपोर्ट

Indore/Dhar News: धार की ऐतिहासिक और विवादास्पद भोजशाला के भविष्य को लेकर आज का दिन निर्णायक साबित हो सकता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 98 दिनों तक किए गए वैज्ञानिक सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट आज 23 फरवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष पेश की जाएगी।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी, जहाँ रिपोर्ट के सीलबंद हिस्सों को कोर्ट के सामने खोला जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी हलचल
इस मामले में कानूनी मोड़ तब आया जब 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर बेंच को तीन हफ्ते के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इससे पहले सर्वे के बाद की कानूनी प्रक्रिया पर लगी रोक हट जाने से अब रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा और दलीलों का रास्ता साफ हो गया है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में इस केस को जबलपुर प्रिंसिपल बेंच स्थानांतरित किया गया था, जिसे चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने पुनः इंदौर बेंच को वापस भेज दिया है।
इन आधुनिक तकनीकों से जुटाए गए साक्ष्य
ASI ने भोजशाला परिसर की असलियत और प्राचीनता का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक ‘हाईटेक’ तकनीकों का सहारा लिया है:
  • GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार): जमीन के भीतर दबे संभावित ढांचों और अवशेषों की खोज के लिए।
  • कार्बन डेटिंग: परिसर में मिले पत्थरों और पुरातात्विक अवशेषों की सटीक उम्र निर्धारित करने के लिए।
  • GPS मैपिंग: पूरे 50 मीटर के दायरे का वैज्ञानिक नक्शा तैयार करने हेतु।
  • डिजिटल रिकॉर्डिंग: साक्ष्यों की प्रमाणिकता के लिए उच्च गुणवत्ता वाली कलर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की गई है।
क्या है विवाद?
भोजशाला में हिंदू पक्ष अपना अधिकार जताते हुए इसे सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान में यहाँ मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की व्यवस्था लागू है। आज कोर्ट में रिपोर्ट खुलने के बाद यह तय होगा कि वैज्ञानिक साक्ष्य किस पक्ष के दावों को मजबूती प्रदान करते हैं।