Indore/Dhar: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और संवेदनशील धार भोजशाला मामले में सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया है कि वे स्वयं भोजशाला जाकर वस्तुस्थिति का अवलोकन करेंगे। इस दौरे के बाद मामले की सुनवाई में और तेजी आने की उम्मीद है।
जजों का दौरा और सुनवाई का क्रम तय
करीब दो घंटे चली लंबी बहस के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी, लेकिन उससे पहले माननीय न्यायाधीश भोजशाला परिसर का दौरा कर वहां की भौगोलिक और पुरातात्विक स्थिति को समझेंगे। कोर्ट ने सुनवाई की प्रक्रिया को व्यवस्थित करते हुए निर्देश दिया कि:
सबसे पहले मुख्य याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे।
इसके बाद इस मामले से जुड़े अन्य पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी।
अंत में इंटरविनर (हस्तक्षेपकर्ता) को मौका दिया जाएगा, ताकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार केस की सुनवाई में देरी न हो।
ASI की सर्वे रिपोर्ट पर तकरार
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से एएसआई (ASI) द्वारा पेश की गई वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई। वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) और अन्य अधिवक्ताओं ने अपनी बात रखी। कोर्ट ने सभी पक्षों को रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव दाखिल करने के लिए समय दिया है।
बता दें कि एएसआई ने 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिनों तक परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में वैज्ञानिक जांच, उत्खनन और आधुनिक तकनीकों (GPR सर्वे) का उपयोग कर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी।
सर्वे रिपोर्ट में क्या हुआ है खुलासा?
एएसआई की रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं शताब्दी तक के महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं:
शिलालेख: परिसर में संस्कृत-प्राकृत और नागरी लिपि के साथ-साथ अरबी-फारसी के शिलालेख मिले हैं।
धार्मिक और शैक्षिक प्रमाण: कुछ पत्थरों पर ‘पारिजातमंजरी-नाटिका’ जैसे ग्रंथों के अंश मिले हैं, जो यहाँ एक बड़े शिक्षण केंद्र (सरस्वती कंठाभरण) होने का संकेत देते हैं।
संरचनात्मक बदलाव: रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई स्थानों पर पुराने शिलालेखों को मिटाकर पत्थरों का दोबारा इस्तेमाल किया गया है। यहाँ कुल 56 अरबी-फारसी शिलालेख भी पाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और कानूनी सफर
यह मामला पहले इंदौर बेंच से जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर किया गया था, लेकिन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने इसे वापस इंदौर खंडपीठ को भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में जल्द सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।
वर्तमान में भोजशाला में मंगलवार को हिंदुओं को पूजा करने और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज अदा करने की व्यवस्था लागू है। अब हाईकोर्ट के जजों के दौरे और 2 अप्रैल की सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह दौरा इस विवाद के कानूनी समाधान की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।