Indore News: ऐतिहासिक धार भोजशाला परिसर विवाद में न्याय की प्रक्रिया अब तेज होने जा रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि इस संवेदनशील मामले पर सोमवार से नियमित (Daily) सुनवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए दोपहर 2:30 बजे का समय निर्धारित किया है।
सुनवाई की रूपरेखा और मुख्य बिंदु
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने साफ किया है कि सुनवाई के दौरान एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सबसे पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे और उसके बाद आपत्तिकर्ताओं (प्रतिवादियों) को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर गौर किया जाएगा:
ASI सर्वे रिपोर्ट: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सौंपी गई विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पर पक्षकारों की आपत्तियां।
वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी: सर्वे के दौरान की गई रिकॉर्डिंग से निकले नए तथ्य।
7 अप्रैल 2003 का आदेश: कोर्ट यह सुनिश्चित करेगा कि एएसआई के पुराने आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और वर्तमान स्थिति
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस विवाद का अंतिम फैसला हाईकोर्ट ही करेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि भोजशाला परिसर के वर्तमान स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही वहां कोई खुदाई या ऐसा निर्माण होगा जिससे संरचना को क्षति पहुंचे।
पक्षकारों की दलीलें
गुरुवार को हुई सुनवाई में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। वहीं, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि रोजाना सुनवाई से मामले का जल्द निराकरण होगा। फिलहाल, एएसआई की रिपोर्ट सभी पक्षों को दी जा चुकी है और उस पर दर्ज की गई आपत्तियों पर सोमवार से बहस शुरू होगी।
क्या है विवाद?
धार स्थित भोजशाला को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है। वर्तमान में एएसआई के 2003 के आदेश के तहत मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज की अनुमति है। अब एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट इस विवाद में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।