मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर एक बार फिर निर्णायक फैसले की मांग उठी है। मंगलवार को वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने भोजशाला परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शासन, प्रशासन और न्यायालय के समक्ष अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं। उनके साथ भोजशाला मुक्ति संगठन के अध्यक्ष गोपाल शर्मा भी मौजूद थे।

संजय अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि भोजशाला का मुद्दा महज किसी भावनात्मक बहस या अस्थायी व्यवस्था का नहीं है। यह ऐतिहासिक सत्य, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक न्याय से जुड़ा एक गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि परमार वंश के राजा भोज के समय में धार शिक्षा, संस्कृत और शास्त्रों के अध्ययन का बड़ा केंद्र था। भोजशाला इसी गौरवशाली गुरुकुल परंपरा का प्रतीक रही है, जिसे पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।
एएसआई रिपोर्ट का दिया हवाला
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा हाल ही में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में मिले पुरातात्विक अवशेष, शिलालेख और स्थापत्य संकेत यह साबित करते हैं कि यह स्थल मूल रूप से मंदिर और शिक्षा का केंद्र था।
“भोजशाला में मिले प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि यह शिक्षा और मंदिर परंपरा से जुड़ा स्थल है। ऐसे में वर्ष 2003 में लागू की गई पूजा-नमाज की अस्थायी व्यवस्था अब अप्रासंगिक हो चुकी है। इसे बनाए रखना ऐतिहासिक सच्चाई के साथ अन्याय होगा।” — संजय अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन