न्यायपालिका में डिजिटल क्रांति, वायनाड में शुरू हुई भारत की पहली पेपरलेस जिला अदालत

भारत की न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केरल के वायनाड जिले के कलपेट्टा में देश की पहली पूरी तरह पेपरलेस जिला अदालत की शुरुआत की गई है। इस अदालत का वर्चुअल उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा किया गया। यह पहल जिला स्तर की न्यायपालिका को आधुनिक, तेज और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

डिजिटल बदलाव की ओर बड़ा कदम

पेपरलेस जिला अदालत का अर्थ है ऐसी न्यायिक व्यवस्था, जहां किसी भी प्रक्रिया में कागज का उपयोग नहीं किया जाता। केस दर्ज करने से लेकर सुनवाई, आदेश और फैसले तक, हर काम पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जाता है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम भी बनेगी।

ई-फाइलिंग से लेकर ई-जजमेंट तक की सुविधा

इस डिजिटल अदालत में मुकदमों की ई-फाइलिंग की सुविधा उपलब्ध है, जिससे वकील और पक्षकार ऑनलाइन ही अपने मामले दर्ज कर सकते हैं। सभी जरूरी दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। सुनवाई की तारीखों का प्रबंधन ऑनलाइन किया जाता है और अदालत के आदेश व फैसले भी ई-ऑर्डर और ई-जजमेंट के रूप में जारी होते हैं।

डिजिटल हस्ताक्षर और पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया

पेपरलेस अदालत में दस्तावेजों की वैधता के लिए डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाता है। इससे फाइलों की सुरक्षा और प्रामाणिकता बनी रहती है। पूरी न्यायिक प्रक्रिया 100 प्रतिशत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होने के कारण पारंपरिक कागजी कामकाज की जरूरत पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

कलपेट्टा की यह पेपरलेस जिला अदालत न केवल तकनीकी प्रगति का उदाहरण है, बल्कि भविष्य की न्याय व्यवस्था की दिशा भी दिखाती है। इससे न्याय तक पहुंच आसान होगी, कामकाज तेज होगा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। यह पहल आने वाले समय में देश की अन्य जिला अदालतों के लिए एक मॉडल साबित हो सकती है।