मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पार्टी के कामकाज के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की हालिया बैठक में उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उनका मुख्य विरोध इस बात को लेकर था कि पार्टी के सभी फैसले दिल्ली से ही क्यों संचालित हो रहे हैं।
दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस संगठन में बदलाव और मजबूती की कोशिशों में जुटी है। खबरों के अनुसार, उन्होंने बैठक में स्पष्ट रूप से पूछा कि आखिर हर निर्णय के लिए दिल्ली की ओर क्यों देखना पड़ता है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर कांग्रेस आलाकमान की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
पीएम मोदी की फोटो और संगठन की नसीहत
इस पूरे मामले को हवा तब मिली जब दिग्विजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने जो लिखा, उसने सियासी गलियारों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी का एक जमीनी कार्यकर्ता देश का प्रधानमंत्री बना, यह संगठन की शक्ति का प्रमाण है।
हालांकि, इस पोस्ट के बाद उन्होंने तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश भी की। दिग्विजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने केवल संगठन की ताकत की प्रशंसा की है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘मैं आरएसएस और मोदी जी का विरोधी हूं, लेकिन संगठन की कार्यप्रणाली की बात अलग है।’
‘जो कहना था, बैठक में कह दिया’
अपनी नाराजगी और सोशल मीडिया पोस्ट पर मचे बवाल के बीच दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में सधे हुए शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने इशारा किया कि उनकी जो भी शिकायतें या सुझाव थे, वे उन्होंने पार्टी के उचित मंच यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक में रख दिए हैं। उनका यह रुख बताता है कि वे पार्टी के अंदरूनी लोकतंत्र में अपनी बात रखने के पक्षधर हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से अनुशासन भी बनाए रखना चाहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी नेता का यह बयान कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय है। जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और विकेंद्रीकरण की मांग अक्सर पार्टी के भीतर से उठती रही है। पीएम मोदी का उदाहरण देकर उन्होंने परोक्ष रूप से कांग्रेस को अपने कैडर को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को महत्व देने की नसीहत दी है।