Indore News: इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने आज इंदौर के प्रशासनिक संकुल स्थित राजस्व न्यायालयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने रोस्टर, लंबित मामलों और सुनवाई की प्रक्रिया की वस्तुस्थिति देखी। इस समीक्षा में कलेक्टर शिवम वर्मा भी मौजूद रहे। संभागायुक्त ने स्पष्ट किया कि राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता सीधे नागरिक सेवाओं से जुड़ी है, इसलिए प्रक्रिया, उपस्थिति और समयबद्धता पर लगातार निगरानी जरूरी है।

डॉ. खाड़े ने दो तहसील न्यायालयों में चल रहे प्रकरणों की विशेष तौर पर समीक्षा की। इनमें बिचौली हप्सी और जूनी इंदौर क्षेत्र के मामले शामिल रहे। उन्होंने इसी क्षेत्राधिकार से जुड़े दो अनुविभागीय राजस्व न्यायालयों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान प्रकरणों की प्रकृति, सुनवाई की गति, आदेशों के अनुपालन और रिकॉर्ड प्रबंधन की स्थिति पर अधिकारियों से बिंदुवार जानकारी ली गई।
निरीक्षण में नामांकन, सीमांकन, बंटवारा और बटांकन जैसे प्रमुख राजस्व प्रकरणों के निराकरण की प्रगति को केंद्र में रखा गया। संभागायुक्त ने कहा कि इन मामलों में देरी का सीधा असर नागरिकों के भूमि अधिकारों और प्रशासनिक सेवाओं पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए मामलों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आवेदनों और लंबित फाइलों की श्रेणीवार समीक्षा नियमित रूप से की जाए।
एडीएम न्यायालयों की अलग से समीक्षा
संभागायुक्त ने दो अपर कलेक्टर न्यायालयों का भी निरीक्षण किया। यह समीक्षा एडीएम रोशन राय और एडीएम रिंकेश वैश्य के न्यायालयों में की गई। उन्होंने लंबित मामलों की संख्या, आदेश पारित होने की गति और अनुपालन की स्थिति पर जानकारी ली। अधिकारियों से कहा गया कि न्यायालयीन कामकाज में अनावश्यक स्थगन कम किए जाएं और पक्षकारों को निर्धारित तारीखों पर प्रभावी सुनवाई उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी समय पर कार्यालय पहुंचें और कामकाज की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। प्रत्येक पक्षकार के प्रकरण का निपटारा तय समयसीमा के भीतर हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही आदेशों की गुणवत्ता और रिकॉर्ड की स्पष्टता को भी अनिवार्य माना जाए, ताकि अपील स्तर पर विवाद की पुनरावृत्ति कम हो और प्रशासनिक समय की बचत हो।
राजस्व वसूली, फील्ड विजिट और जवाबदेही पर जोर
डॉ. खाड़े ने राजस्व वसूली की प्रगति को भी समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि नामांकन, सीमांकन, बंटवारा और बटांकन से जुड़े प्रकरणों के साथ वसूली संबंधी काम में भी तेजी लाई जाए। राजस्व अधिकारियों को कार्यालय कार्य और फील्ड विजिट का समय निर्धारण कर क्षेत्रीय स्थितियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधीनस्थ अमले के काम की नियमित समीक्षा और क्षेत्र में सतत भ्रमण को अनिवार्य बताया।
निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारियों से संभागायुक्त ने कहा कि राजस्व प्रशासन का काम केवल कार्यालयी निस्तारण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्राम और शहरी क्षेत्र में वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए मौके पर जाकर सत्यापन जरूरी है। इससे प्रकरणों के तथ्य स्पष्ट होते हैं और विवादों का समाधान अपेक्षाकृत तेज होता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर नागरिकों की शिकायतें भी समय रहते चिन्हित की जा सकती हैं।
संकल्प से समाधान अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
समीक्षा बैठक में संभागायुक्त ने संकल्प से समाधान अभियान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए अभियान का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाए। ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम और नगर परिषद स्तर तक लगाए जा रहे शिविरों में योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया। प्राप्त आवेदनों का त्वरित परीक्षण कर पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
“संकल्प से समाधान अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।” — डॉ. सुदाम खाड़े
डॉ. खाड़े ने लोकसेवा गारंटी योजना से जुड़े प्रकरणों के समयसीमा में निराकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवा वितरण की विश्वसनीयता तभी बनेगी जब निर्धारित समय में आदेश और सेवा दोनों उपलब्ध हों। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पंवार, रोशन राय, रिंकेश वैश्य और निशा डामोर सहित सभी एसडीएम और तहसीलदार उपस्थित रहे। बैठक में विभागीय समन्वय, लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करने और नियमित समीक्षा तंत्र को मजबूत करने पर सहमति बनी।