Indore/Bhopal: मध्य प्रदेश के आम बजट पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। केंद्र सरकार ने 11 महीने के लंबे अंतराल के बाद घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपए की भारी बढ़ोतरी कर दी है।
इसके साथ ही व्यापारिक इस्तेमाल में आने वाले 19 किलोग्राम के कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम भी 115 रुपए बढ़ा दिए गए हैं। सिलेंडर की ये नई दरें 7 मार्च 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो गई हैं।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।
बड़े शहरों का गणित: कहाँ कितनी ढीली होगी जेब?
मध्य प्रदेश के प्रमुख महानगरों में अब रसोई गैस के लिए ग्राहकों को पहले के मुकाबले काफी अधिक भुगतान करना होगा।
इंदौर: आर्थिक राजधानी में अब सिलेंडर 941 रुपए में मिलेगा।
भोपाल: राजधानी में नई कीमत 918 रुपए तय की गई है।
ग्वालियर: यहाँ प्रदेश के बड़े शहरों में सबसे अधिक 996.50 रुपए चुकाने होंगे।
जबलपुर: संस्कारधानी में सिलेंडर 919 रुपए का होगा।
उज्जैन: बाबा महाकाल की नगरी में अब 972 रुपए का भुगतान करना होगा।
नर्मदापुरम में सबसे महंगी गैस, शाजापुर-सीहोर में राहत
प्रदेश में कीमतों का वितरण भौगोलिक और लॉजिस्टिक कारणों से अलग-अलग है। नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के निवासियों को सबसे बड़ा झटका लगा है, जहाँ सिलेंडर की कीमत 1035 रुपए तक पहुँच गई है। इसके अलावा भिंड, मुरैना, निवाड़ी और श्योपुर जैसे जिलों में भी कीमतें 1000 रुपए के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुँच गई हैं।
राहत की बात करें तो शाजापुर और सीहोर में सिलेंडर सबसे सस्ता यानी 918.50 रुपए में उपलब्ध होगा। इसके साथ ही सागर, विदिशा और दमोह जैसे जिलों में भी दरें तुलनात्मक रूप से कम रहेंगी।
क्यों बढ़ी कीमतें? युद्ध और किल्लत की आशंका
बाजार जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की अस्थिरता इसका मुख्य कारण है। इससे पहले 1 मार्च को ही कॉमर्शियल गैस के दाम 31 रुपए बढ़ाए गए थे। सरकार को डर है कि खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति बनने पर सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।
इसी खतरे को भांपते हुए केंद्र सरकार ने 5 मार्च को अपनी इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल किया। सरकार ने सभी रिफाइनरी कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) को आदेश दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर केवल रसोई गैस बनाने के लिए करें, ताकि घरेलू किल्लत को रोका जा सके।
अनिवार्य वस्तु अधिनियम (ESMA) का सहारा
सरकार ने यह सख्त कदम एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 के तहत उठाया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियाँ अधिक मुनाफे के चक्कर में गैस का निर्यात न करें, बल्कि देश की जरूरतों को पूरा करें। इससे पहले ऐसा कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उठाया गया था।
फ्लैशबैक: गौरतलब है कि पिछली बार 8 अप्रैल 2025 को दाम बढ़े थे। हालांकि, सरकार ने पिछले साल 8 मार्च 2024 (महिला दिवस) पर 100 रुपए की कटौती कर जनता को राहत दी थी, जो अब इस नई बढ़ोत्तरी के बाद बेअसर होती दिख रही है।