काशी में गूंजेगा सम्राट विक्रमादित्य का जयघोष: 3 अप्रैल से वाराणसी में ‘विक्रम उत्सव’ का भव्य आगाज, जुटेंगे दिग्गज राजनेता

Varanasi/Ujjain News: धर्म और संस्कृति की दो महान नगरियों—अवंतिका (उज्जैन) और काशी (वाराणसी)—का अनूठा संगम होने जा रहा है। भारत के सांस्कृतिक वैभव और न्यायप्रियता के प्रतीक ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की गौरवगाथा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी में जीवंत होगी। आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में भव्य महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन किया जाएगा।

उज्जैन से रवाना हुआ 200 सदस्यीय दल

इस भव्य आयोजन के लिए कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों का 200 सदस्यीय दल बुधवार सुबह उज्जैन से ‘काशी-महाकाल एक्सप्रेस’ के जरिए वाराणसी के लिए रवाना हुआ।

महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के पराक्रम और उनके सांस्कृतिक योगदान को आधुनिक तकनीक और प्रभावशाली अभिनय के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। आकर्षण को बढ़ाने के लिए उज्जैन के ‘श्री भस्म रमैया भक्त मंडल’ के 50 कलाकार डमरू वादन की विशेष प्रस्तुति भी देंगे।

प्रमुख आकर्षण और प्रदर्शनी

कार्यक्रम स्थल पर केवल नाटक ही नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को दर्शाने वाली कई प्रदर्शिनियाँ भी लगाई जाएंगी। इनमें ‘आर्ष भारत’, ‘शिव पुराण’, ‘चौरासी महादेव’ और ‘श्रीहनुमान’ जैसी थीम पर आधारित स्टॉल्स मुख्य आकर्षण होंगे। साथ ही, “स्वाद” खंड में देशज व्यंजनों का मेला लगेगा, जहाँ लोग पारंपरिक भारतीय खान-पान का आनंद ले सकेंगे।

दिग्गजों की उपस्थिति

उत्सव के शुभारंभ अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है। यह आयोजन न केवल मनोरंजन बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बनेगा।