आर्थिक अन्वेषण शाखा (EOW) ने एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर में हुई बड़ी धोखाधड़ी के मामले में सख्त कदम उठाते हुए इंदौर की उत्कर्ष पैराडाइज कॉलोनी से जुड़े प्रकरण में तीन बिल्डर ग्रुप के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई करीब 3.12 करोड़ रुपये की कथित ठगी को लेकर की गई है, जिसमें एएम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, अलमोईन देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड और जेएसआर रियलिटी को आरोपी बनाया गया है।
इन बिल्डरों पर दर्ज हुआ केस
ईओडब्ल्यू ने एएम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के डायरेक्टर साजिद शेख (पिता आमीन, निवासी ग्रीन पार्क कॉलोनी, इंदौर) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसके साथ ही अलमोईन देवकॉन प्रालि के संचालक मोहम्मद राशिद शेख और जेएसआर रियलिटी के संचालक मोहम्मद जावेद शेख को भी आरोपी बनाया गया है। तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (षड्यंत्र) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।
प्लॉट सौदे से शुरू हुआ पूरा विवाद
मामले की शुरुआत वर्ष 2012 से होती है, जब फरियादी गौतम जैन (पिता गजेन्द्र जैन, निवासी विजय नगर, इंदौर) ने उत्कर्ष पैराडाइज कॉलोनी में स्थित करीब 17,151 वर्गफीट का आवासीय भूखंड खरीदा था। यह सौदा एएम बिल्डर्स के डायरेक्टर साजिद शेख के माध्यम से हुआ। भूखंड के बदले करीब 2.50 करोड़ रुपये की राशि छह चेक के जरिए दी गई, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए और गौतम जैन को भुगतान नहीं मिला।
विक्रय अनुबंध और रजिस्ट्री में गड़बड़ी
साल 2013 में गौतम जैन और साजिद शेख के बीच उक्त भूखंड पर बहुमंजिला इमारत निर्माण के लिए विक्रय अनुबंध और पावर ऑफ अटॉर्नी की गई। इसके बावजूद अगस्त 2014 में साजिद शेख ने उसी प्लॉट को अलमोईन देवकॉन प्रालि के डायरेक्टर मोहम्मद राशिद शेख के नाम रजिस्ट्री कर बेच दिया। इस प्रक्रिया में मूल भुगतान और अधिकारों की अनदेखी की गई।
नया समझौता, लेकिन वह भी अधूरा
इसके बाद एएम बिल्डर्स और अलमोईन देवकॉन के संचालकों की ओर से उनके भाई और जेएसआर रियलिटी के डायरेक्टर मोहम्मद जावेद शेख ने गौतम जैन से नया समझौता किया। इस समझौते में प्लॉट नंबर 307 के बदले महू स्थित गोल्ड सिटी कॉलोनी में 32,276 वर्गफीट का प्लॉट देने का वादा किया गया। यह अनुबंध मात्र 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर किया गया, लेकिन इसकी भी कभी रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
प्लॉट हड़पकर गबन का आरोप
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि साजिद शेख, राशिद शेख और जावेद शेख ने मिलकर न तो गौतम जैन को प्लॉट का पूरा भुगतान किया और न ही वैकल्पिक प्लॉट की रजिस्ट्री करवाई। आरोप है कि प्लॉट नंबर 307 को अपने कब्जे में लेकर उसका गबन कर लिया गया।
बिना निर्माण के फ्लैटों की बिक्री
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोपियों ने प्लॉट नंबर 307 पर ‘एएम गिन्नी’ नामक बहुमंजिला इमारत में 52 फ्लैट बनाने की योजना शुरू की, लेकिन 12 वर्षों में भी निर्माण पूरा नहीं हुआ। इसके बावजूद पहली मंजिल पर फ्लैट नंबर 110 शिकायतकर्ता कमलेश सेनानी को 15.65 लाख रुपये में बेच दिया गया। यह राशि अलमोईन देवकॉन के डायरेक्टर मोहम्मद राशिद शेख को दी गई।
अन्य खरीदार भी बने शिकार
इसी प्रोजेक्ट में न्यू पलासिया निवासी स्नेहलता हांडा ने कुल छह फ्लैट खरीदे, जिनके लिए उन्होंने 27.64 लाख रुपये का भुगतान किया। हालांकि, आज तक न तो फ्लैट का निर्माण पूरा हुआ और न ही उन्हें कब्जा दिया गया।
कुल 3.12 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप
ईओडब्ल्यू के अनुसार, आरोपियों ने पहले गौतम जैन से प्लॉट के नाम पर करीब 2.70 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। इसके बाद फ्लैट बिक्री के नाम पर कमलेश सेनानी से 15.65 लाख और स्नेहलता हांडा से 27.64 लाख रुपये हड़प लिए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 3.12 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। मामले की विस्तृत जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है।