फ्रैंकलिन टेम्पलटन: कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4000 किमी की यात्रा, महिलाओं को निवेश सिखाने के लिए शुरू हुआ ‘चेंज द सोच’ अभियान

म्यूचुअल फंड कंपनी फ्रैंकलिन टेम्पलटन (इंडिया) ने देश में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए एक बड़े अभियान का आगाज किया है। ‘चेंज द सोच – कन्याकुमारी से कश्मीर ड्राइव’ नाम की इस पहल का मकसद खास तौर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। कंपनी भारत में अपने संचालन के 30 साल पूरे होने का जश्न मना रही है और इसी उपलक्ष्य में इस 30 दिवसीय यात्रा की शुरुआत की गई है।

इस अभियान के तहत दक्षिण भारत के कन्याकुमारी से लेकर उत्तर में श्रीनगर तक का सफर तय किया जाएगा। यह यात्रा कुल 21 शहरों से होकर गुजरेगी। इस दौरान म्यूचुअल फंड निवेश और वित्तीय प्रबंधन को लेकर लोगों, विशेषकर महिलाओं को जागरूक किया जाएगा।

प्रेसिडेंट खुद करेंगे 4000 किमी का सफर

इस अनूठी पहल का नेतृत्व फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया के प्रेसिडेंट अविनाश सत्वालेकर खुद कर रहे हैं। वे कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेंगे। इस देशव्यापी सफर का उद्देश्य हर वर्ग के लोगों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ना है। योजना के मुताबिक, वे हर दूसरे दिन किसी नए शहर या गांव में रुकेंगे। वहां अलग-अलग पृष्ठभूमि की महिलाओं के लिए विशेष निवेशक शिक्षा कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

बचत से निवेश की ओर

अभियान का मुख्य लक्ष्य महिलाओं की सोच को सिर्फ पारंपरिक बचत तक सीमित न रखकर उन्हें सक्रिय निवेशक बनाना है। इन सत्रों में बचत, निवेश और लंबे समय में संपत्ति (Wealth Creation) बनाने के महत्व पर जोर दिया जाएगा।

इस पहल में समाज के विभिन्न वर्गों की महिलाओं को शामिल किया जाएगा:

ग्रामीण और शहरी भागीदारी: इसमें मछुआरा समुदाय और खेती से जुड़ी किसान महिलाएं शामिल होंगी।

पेशेवर और उद्यमी: शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग, खाद्य और हथकरघा क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह (SHGs), महिला उद्यमी और सरकारी व निजी कर्मचारी।

सुरक्षा बल: सेना, नौसेना और पुलिस में कार्यरत महिलाएं भी इस अभियान का हिस्सा बनेंगी।

क्या है उद्देश्य?

फ्रैंकलिन टेम्पलटन–इंडिया के प्रेसिडेंट अविनाश सत्वालेकर ने इस मौके पर कहा कि शहरी इलाकों में वित्तीय साक्षरता को लेकर कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन टियर-2 और टियर-3 शहरों में अभी भी बहुत काम करना बाकी है।

“महिलाओं में वित्तीय समझ भारत की लंबे समय की सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए बहुत जरूरी है। इस पहल के जरिए हम अलग-अलग पृष्ठभूमि की महिलाओं से जुड़ेंगे और उन्हें बचत, निवेश और डिजिटल वित्त को अपनाने के लिए जरूरी जानकारी और आत्मविश्वास देंगे।” — अविनाश सत्वालेकर, प्रेसिडेंट, फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया

उन्होंने आगे कहा कि जब महिलाएं सोच-समझकर वित्तीय फैसले लेती हैं, तो पूरा परिवार मजबूत होता है। यह कदम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने और एक समावेशी वित्तीय व्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इन सत्रों के माध्यम से हजारों भारतीयों को अपने वित्तीय भविष्य की जिम्मेदारी खुद लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।