1 अप्रैल से खेती की जमीन से लेकर फ्लैट होंगे महंगे, जारी हुए निर्देश

मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू होने की संभावना है, जिसमें रजिस्ट्री दरों में औसतन 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। खासतौर पर भोपाल में 14% और इंदौर में 30% तक दरें बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा गया है। इस बदलाव के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया महंगी हो सकती है, जिससे संपत्ति खरीदने वालों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम बनाम विंसेंट डेनियल प्रकरण में सुनवाई करते हुए गाइडलाइन दरों के निर्धारण को लेकर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इन दरों का निर्धारण वैज्ञानिक और विशेषज्ञ-आधारित तरीके से होना चाहिए, जो वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करें, न कि कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई दरों पर आधारित हो।

गाइडलाइन बढ़ने के बावजूद कोई सुधार नहीं, रजिस्ट्री की लागत बढ़ रही

नई गाइडलाइन के साथ साथ लागू होने वाले उपबंधों की वजह से कृषि भूमि और फ्लैट की रजिस्ट्री की कीमतें बढ़ रही हैं। कृषि भूमि की रजिस्ट्री दोगुनी महंगी हो चुकी है, जबकि फ्लैट की रजिस्ट्री की लागत डेढ़ गुनी तक बढ़ चुकी है। इस बढ़ोतरी के कारण आम नागरिकों को संपत्ति रजिस्ट्री के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

क्रेडाई का विरोध – दरों में सुधार की मांग

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने इस बढ़ोतरी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह उनकी संगठन की लंबे समय से चली आ रही मांग की पुष्टि है कि रजिस्ट्री दरों में वैज्ञानिक और बाजार आधारित तरीके से सुधार किया जाना चाहिए। क्रेडाई के प्रदेश अध्यक्ष, धीरेश खरे ने भी इस बढ़ोतरी को लेकर आवाज उठाई है और कहा है कि सरकार को दरों के निर्धारण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

नए सॉफ्टवेयर के तहत दरों का निर्धारण

नई गाइडलाइन दरों का निर्धारण अब सॉफ्टवेयर के जरिए किया जा रहा है, जो सभी जिलों की रजिस्ट्री और मूल्यांकन समितियों के आंकड़ों पर आधारित होता है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड इस बारे में जल्द ही अंतिम निर्णय लेगा। हालांकि, रजिस्ट्री की दरों में बढ़ोतरी के कारण संपत्ति खरीदने वालों को अतिरिक्त खर्चों का सामना करना पड़ सकता है।