Silver Gold Closing Price: सोने और चांदी के घरेलू बाजार में आज 17 फरवरी को भी गिरावट जारी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी का भाव ₹6,667 घटकर ₹2.34 लाख पर आ गया। इसी दिन 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹2,903 सस्ता होकर ₹1.51 लाख पर दर्ज किया गया।
चांदी में यह लगातार चौथे कारोबारी दिन की गिरावट है। पिछले चार सत्रों में चांदी की कीमत ₹32 हजार कम हुई है। सोने में भी इसी अवधि में ₹6 हजार की कमी आई है, जिससे साफ है कि हालिया तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बना हुआ है।
29 जनवरी के उच्च स्तर से बड़ी नरमी
IBJA के आंकड़ों के अनुसार चांदी ने 29 जनवरी को ₹3.86 लाख प्रति किलो का उच्च स्तर बनाया था। मौजूदा ₹2.34 लाख के स्तर तक आते-आते इसमें कुल ₹1.51 लाख की गिरावट दर्ज हो चुकी है। यह गिरावट बताती है कि ऊंचे स्तरों से तेजी तेज रफ्तार में ठंडी हुई है।
सोने ने भी 29 जनवरी को ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम का उच्च स्तर छुआ था। अब भाव ₹1.51 लाख पर है, यानी उस शिखर से करीब ₹25 हजार की कमी दर्ज हुई है। चार दिन की हालिया गिरावट इस बड़ी कमजोरी का नया चरण मानी जा रही है।
सालाना प्रदर्शन अब भी मजबूत
हालिया नरमी के बावजूद 2025 के पूरे कैलेंडर वर्ष का प्रदर्शन दोनों धातुओं में मजबूत रहा था। 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना ₹76 हजार प्रति 10 ग्राम था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹1.33 लाख हो गया। इस तरह साल भर में सोना ₹57 हजार, यानी करीब 75% बढ़ा।
चांदी में बढ़त इससे भी ज्यादा रही। 31 दिसंबर 2024 को चांदी ₹86 हजार प्रति किलो थी और 31 दिसंबर 2025 को ₹2.30 लाख प्रति किलो पहुंच गई। यानी साल के दौरान ₹1.44 लाख या करीब 167% की उछाल दर्ज हुई।
इसी पृष्ठभूमि में मौजूदा गिरावट को समझना जरूरी है। जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर खरीदारी की, उनके लिए हालिया उतार-चढ़ाव महत्वपूर्ण है। वहीं लंबी अवधि के आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले साल की तेजी बहुत तेज थी, इसलिए बीच-बीच में करेक्शन की गुंजाइश बनी रहती है।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों
ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी लागत: सोना एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाने में ईंधन, बीमा और सुरक्षा का खर्च शामिल होता है। आयात या बड़े वितरण केंद्र से दूरी बढ़ने पर यह लागत ज्यादा हो जाती है, जिसका असर स्थानीय रेट पर पड़ता है।
खरीद की मात्रा: जिन क्षेत्रों में खपत ज्यादा होती है, वहां ज्वेलर्स बड़ी मात्रा में खरीद करते हैं। बल्क खरीद में मिलने वाली छूट से खुदरा कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। दक्षिण भारत को अक्सर ऊंची खपत वाला क्षेत्र माना जाता है, जहां बड़े वॉल्यूम का असर रेट पर दिख सकता है।
स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन की भूमिका: अलग-अलग राज्यों और शहरों के ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग और सप्लाई की स्थिति को देखते हुए दैनिक भाव तय करने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से एक ही दिन अलग शहरों में दरों में फर्क दिखता है।
पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने स्टॉक किस दर पर खरीदा था, यह भी अंतिम बिक्री मूल्य पर असर डालता है। जिन कारोबारियों के पास पुराने और कम कीमत वाले स्टॉक होते हैं, वे प्रतिस्पर्धी रेट दे सकते हैं, जबकि ऊंचे भाव पर खरीदे स्टॉक वाले विक्रेता का रेट अलग हो सकता है।
निवेशकों और खरीदारों के लिए संकेत
ताजा आंकड़े बताते हैं कि कम समय में तेज उतार-चढ़ाव जारी है। ऐसे में खरीद या निवेश के फैसले लेते समय एक दिन के भाव की जगह ट्रेंड, ऊंचे-निचले स्तर और पिछले कारोबारी सत्रों के बदलाव को साथ देखकर निर्णय लेना ज्यादा व्यावहारिक माना जाता है। IBJA के दैनिक संकेतक इसी वजह से बाजार के लिए अहम संदर्भ बने रहते हैं।