भागीरथपुरा जलजनित घटना पर सरकार सख्त, पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित घटना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य में इस प्रकार की किसी भी घटना की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नगर निगम को मिलेगा पर्याप्त अमला और संसाधन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए कि नगर निगम की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त अमला और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है, ताकि भविष्य में दूषित पानी की समस्या उत्पन्न न हो। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन संजय दुबे को इंदौर में ही तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा सके और आवश्यक निर्णय तुरंत लिए जा सकें।

शुद्ध पेयजल आपूर्ति पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। जलापूर्ति दोबारा शुरू होने के दौरान यदि कहीं भी लीकेज या संदूषण की आशंका सामने आती है, तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में जलापूर्ति शुद्ध पाई गई है, जबकि शेष हिस्सों में पुरानी और क्षतिग्रस्त लाइनों के कारण समस्या सामने आई है, जिन्हें दुरुस्त किया जा रहा है।

जांच के बाद लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर हुई किसी भी प्रकार की लापरवाही की जांच की जा रही है। विस्तृत जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि एक भी नागरिक को इस तरह की परेशानी न हो, यह सरकार की जिम्मेदारी है। जो घटना हुई वह दुखद है, लेकिन इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सरकार पूरी गंभीरता से कदम उठा रही है।

प्रशासन और चिकित्सा टीमों की तत्परता की सराहना

मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, शासकीय एवं निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वित प्रयासों से आपात स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया गया और प्रभावित नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया।

स्क्रीनिंग और मरीजों की वर्तमान स्थिति

बैठक में बताया गया कि भागीरथपुरा वार्ड क्षेत्र में गंदे पानी की आपूर्ति की आशंका सामने आने के बाद त्वरित कार्रवाई की गई। बीते दो-तीन दिनों में 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 2,456 संदिग्ध मामलों में लक्षण पाए गए। इनमें से 212 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया, जिनमें 50 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि 162 मरीजों का उपचार जारी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे स्वयं विभिन्न अस्पतालों में जाकर मरीजों से मिले हैं और अधिकांश मरीजों की स्थिति स्थिर है।

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

इस बैठक में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक मालिनी गौड़ और गोलू शुक्ला, अपर मुख्य सचिव सीएम सचिवालय नीरज मंडलोई, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।

भविष्य की कार्ययोजना पर भी हुआ मंथन

बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि शहर के नागरिकों को हमेशा सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।भागीरथपुरा जलजनित घटना पर सरकार सख्त, पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश