Gudi Padwa : हिंदू धर्म में विभिन्न व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है, जिनमें से एक महत्वपूर्ण त्योहार है गुड़ी पड़वा। यह त्योहार महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है और दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी इसे धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल गुड़ी पड़वा 30 मार्च को मनाया जाएगा, जो चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होगा।
चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि आज शाम 4:27 बजे से शुरू हो चुकी है, और इसका समापन कल दोपहर 12:49 बजे होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, उदया तिथि मान्य होती है, इसलिए गुड़ी पड़वा कल मनाया जाएगा। इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि और विक्रम संवंत 2082 का भी आगमन हो रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
गुड़ी पड़वा की पूजा का शुभ समय सुबह 6:13 बजे से 10:22 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक होगा। इस दौरान पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
गुड़ी पड़वा पूजा विधि
गुड़ी पड़वा की पूजा विधि बहुत खास होती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और फिर सूर्य भगवान को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद घर में रंगोली बनाकर, फूलों से सजावट करनी चाहिए। घर के मुख्य द्वार या छत पर एक झंडा यानी ‘गुड़ी’ फहरानी चाहिए। फिर गुड़ी की पूजा करें और उसे भोग अर्पित करें। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, ब्रह्मा जी और माता रानी की पूजा भी महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान करना चाहिए। दान और गरीबों को सहायता देना इस दिन का एक अहम हिस्सा है।
Gudi Padwa का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, गुड़ी पड़वा के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, इसलिए इस दिन ब्रह्मा जी की पूजा का विशेष महत्व है। यह दिन हिंदू धर्म की परंपराओं, संस्कृति और कृषि के महत्व को भी दर्शाता है। गुड़ी पड़वा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समृद्धि, खुशी और नए प्रारंभ का प्रतीक है।