ग्वालियर: नगर निगम द्वारा बनाए जा रहे द्वारिकाधीश भवन के निर्माण में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर की शर्तों को ताक पर रखकर धौलपुर के महंगे लाल पत्थर की जगह सस्ता स्थानीय पत्थर लगा दिया। इस मामले में करीब 50 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का अनुमान लगाया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम आयुक्त ने जांच के आदेश देते हुए ठेकेदार का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
यह भवन शहर के वार्ड 37 में लगभग 1.5 करोड़ रुपये की लागत से एक सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए एक किफायती स्थान उपलब्ध कराना है। लेकिन अब यह महत्वाकांक्षी परियोजना भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गई है।
ऐसे हुआ घोटाले का खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा महापौर परिषद के सदस्य (MIC) अवधेश कौरव की सतर्कता से हुआ। उन्हें शिकायत मिली थी कि द्वारिकाधीश भवन के निर्माण में स्वीकृत सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि भवन में लगाए गए पत्थर धौलपुर के लाल पत्थर नहीं, बल्कि कराहई क्षेत्र से लाए गए सस्ते स्थानीय पत्थर थे।
दोनों पत्थरों की कीमतों में भारी अंतर है। जानकारी के अनुसार, धौलपुर का लाल पत्थर बाजार में 125 से 150 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से मिलता है, जबकि कराहई का स्थानीय पत्थर महज 35 से 40 रुपये प्रति वर्ग फुट में उपलब्ध है। ठेकेदार ने इसी मूल्य अंतर का फायदा उठाकर निगम को लाखों का चूना लगाने की कोशिश की।
आयुक्त ने दिए जांच के आदेश, भुगतान रोका
MIC सदस्य अवधेश कौरव ने निरीक्षण के बाद तत्काल नगर निगम आयुक्त किशोर कन्याल को पत्र लिखकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और ठेकेदार फर्म ‘सिद्धार्थ निर्माण कंपनी’ का भुगतान रोकने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।
नगर निगम आयुक्त किशोर कन्याल ने इस संबंध में एक जांच समिति गठित करने के आदेश दिए हैं और ठेकेदार के सभी भुगतानों पर रोक लगा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
“मामला संज्ञान में आया है। जांच के आदेश दिए गए हैं। यदि जांच में पुष्टि होती है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” — किशोर कन्याल, आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर
इस मामले ने एक बार फिर नगर निगम के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इस स्तर का घोटाला संभव नहीं है। अब जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि इस भ्रष्टाचार में कौन-कौन शामिल है।