ग्वालियर में इस बार फरवरी का मौसम पूरी तरह बदला हुआ दिखा। पिछले एक दशक में पहली बार इस महीने में कड़ी धूप और गर्मी जैसे हालात बने हैं। आमतौर पर फरवरी में ठंड का असर बरकरार रहता है, लेकिन इस साल स्थिति अलग रही।
10 साल में सबसे गर्म फरवरी
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ग्वालियर में फरवरी 2025 में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया। दिन का अधिकतम तापमान कई बार 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। यह पिछले 10 वर्षों में फरवरी का सबसे गर्म दौर माना जा रहा है।
सर्दियों का मौसम इस बार जल्दी विदा हो गया। जनवरी के अंत से ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी शुरू हो गई थी। फरवरी में तो धूप इतनी तीखी रही कि लोगों को गर्मियों जैसा एहसास हुआ।
गेहूं की फसल पर गंभीर खतरा
तापमान में अचानक बढ़ोतरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूं की फसल के लिए फरवरी-मार्च का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान फसल में दाने भरने की प्रक्रिया चलती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की फसल को इस समय ठंडे मौसम की जरूरत होती है। तेज धूप और बढ़ता तापमान दानों की गुणवत्ता और वजन दोनों को प्रभावित करता है। अगर यही हालात जारी रहे तो उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट संभव है।
किसानों में बढ़ी चिंता
ग्वालियर-चंबल अंचल के किसान इस मौसमी बदलाव से परेशान हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने इतनी जल्दी गर्मी पहले कभी नहीं देखी। फसल को बचाने के लिए अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे लागत बढ़ रही है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे हल्की सिंचाई करते रहें। इससे फसल पर गर्मी का असर कम किया जा सकता है। साथ ही पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने की भी सिफारिश की गई है।
जलवायु परिवर्तन का असर
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में सर्दियों का मौसम लगातार छोटा हो रहा है। ग्वालियर जैसे मध्य भारत के शहरों में यह प्रभाव और अधिक दिखाई दे रहा है।
पिछले साल भी मार्च में तापमान तेजी से बढ़ा था, लेकिन फरवरी में ऐसी स्थिति नहीं बनी थी। इस बार जनवरी के बाद से ही पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता कम रही, जिसके कारण ठंडी हवाओं का प्रवाह रुक गया।
आगे कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना रहने की संभावना है। मार्च के पहले सप्ताह तक किसी बड़ी राहत के आसार नहीं हैं।
ऐसे में गेहूं उत्पादक किसानों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे शाम के समय सिंचाई करें और फसल की निगरानी बढ़ाएं। समय रहते सावधानी बरतने से नुकसान को कम किया जा सकता है।
ग्वालियर संभाग में गेहूं प्रमुख रबी फसल है। लाखों किसानों की आजीविका इस पर निर्भर है। मौसम की मार से फसल प्रभावित होने पर किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।